हादी हत्याकांड पर बांग्लादेश में बवाल; सड़कों पर कट्टरपंथी, भारतीयों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग
Bangladesh News: बांग्लादेश में छात्र नेता स्मान हादी की हत्या के बाद तनाव चरम पर है। प्रदर्शनकारियों ने ढाका की सड़कों पर मार्च निकाल कर भारतीयों के वर्क परमिट पर रोक लगाने की मांग की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
हादी हत्याकांड पर बांग्लादेश में बवाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Anti-India Protest: बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को ढाका में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली सुबह करीब 11:30 बजे शाहबाग से शुरू हुई। प्रदर्शनकारी 10 पिकअप वैन और पैदल मार्च करते हुए साइंस लैब, मोहम्मदपुर, मीरपुर-10, उत्तरा, बसुंधरा और जात्राबारी जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरे।
‘इंकलाब मंच’ द्वारा आयोजित इस मार्च का उद्देश्य हादी की हत्या की जांच में तेजी लाना और 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले दोषियों को सजा दिलाना है।
भारतीयों के वर्क परमिट पर रोक की मांग
इस प्रदर्शन की सबसे चौंकाने वाली मांग भारतीय नागरिकों से जुड़ी है। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि बांग्लादेश में रहने वाले सभी भारतीयों के वर्क परमिट रद्द किए जाएं। इसके पीछे प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हादी की हत्या के आरोपी भारत में शरण लिए हुए हैं। ‘इंकलाब मंच’ ने स्पष्ट किया है कि यदि भारत इन कथित हत्यारों को सौंपने से इनकार करता है, तो बांग्लादेश सरकार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का रुख करना चाहिए।
सम्बंधित ख़बरें
Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के सीजफायर पर बनी सहमति, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा
फिलीपींस में कुदरत का कहर: आंधी से ढही 9 मंजिला इमारत, मलबे में दबे दर्जनों मजदूरों को बचाने की जंग जारी!
Kyiv Air Strike: रूस की कीव में एयर स्ट्राइक, रिहायशी इलाकों पर हमले में 1 की मौत, कनाडा ने की निंदा
पाकिस्तान के क्वेटा में बड़ा बम धमाका, आत्मघाती हमलावर ने उड़ाया रेलवे ट्रैक, 23 लोगों की मौत, कई घायल- VIDEO
कौन थे शरीफ उस्मान हादी?
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी जुलाई-अगस्त 2024 के उन हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आए थे, जिसके कारण शेख हसीना सरकार का पतन हुआ था। 12 दिसंबर 2025 को ढाका में एक चुनावी अभियान के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें गोली मार दी गई।
गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया जहां 18 दिसंबर को उनका निधन हो गया। वह आगामी 12 फरवरी के चुनावों में एक उम्मीदवार भी थे। उनकी मौत ने बांग्लादेश और भारत के संबंधों में भी कड़वाहट पैदा कर दी है क्योंकि कुछ समूह इस हत्या में भारत का हाथ होने का निराधार आरोप लगा रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर फिर तनाव! मोर्टार हमले में सैनिक घायल, संघर्षविराम टूटने का आरोप
भारत का रुख और अन्य मांगें
भारतीय अधिकारियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि हत्यारों के सीमा पार कर भारत में घुसने का कोई सबूत नहीं है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सेना खुफिया महानिदेशालय (DGFI) के भीतर मौजूद उन लोगों की पहचान की जाए जिन्हें वे ‘फासीवादी सहयोगी’ कह रहे हैं। मार्च के दौरान “मेरा भाई कब्र में है, हत्यारा आजाद क्यों?” जैसे भावुक और आक्रामक नारे भी लगाए गए।
