यूनुस और जमात ने करवाई उस्मान हादी की हत्या! ढाका में रची गई साजिश, क्यों डरे थे कट्टरपंथी?

Osman Hadi murder Case: हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी के अंदर सत्ता की लड़ाई हो सकती है। उसकी बढ़ती लोकप्रियता और चुनावों से पहले संगठन में मतभेदों ने इसे गंभीर बना दिया था।
jamaat e islami killed osman hadi
जमात-ए-इस्लामी पर उस्मान हादी की हत्या आरोप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Jamaat e Islami killed Osman Hadi: बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ी हलचल मचाने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। न्यूज18 इंडिया के सूत्रों के अनुसार, हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी के एक धड़े का हाथ हो सकता है। सूत्रों का दावा है कि यह कोई बाहरी साजिश नहीं थी, बल्कि जमात के अंदर सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा था। 

सूत्रों के अनुसार, हादी की लोकप्रियता, खासकर युवा वोटरों और छात्रों के बीच बढ़ रही थी, जो जमात के लिए चिंता का कारण बन चुकी थी। आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले हादी एक अहम चुनावी फैक्टर बन चुके थे, जिससे जमात की पारंपरिक राजनीति और नेतृत्व को खतरा महसूस होने लगा था।

क्या ढाका में रची गई साजिश?

सूत्रों ने बताया कि, उस्मान हादी को खत्म करने की साजिश ढाका स्थित जमात कार्यालय में रची गई थी। संगठन के भीतर एक गुट चाहता था कि हादी को पूरी तरह रास्ते से हटा दिया जाए। प्रारंभ में हत्या के लिए एक करोड़ टका की रकम तय की गई थी, लेकिन बाद में इसके लेकर जमात के अंदर ही मतभेद उत्पन्न हो गए।  एक गुट का मानना था कि इतनी बड़ी राजनीतिक चुनौती को हटाने के लिए रकम अधिक होनी चाहिए, जबकि दूसरा गुट खर्च कम रखने की बात कर रहा था। इस खींचतान के बीच यह मामला संगठन के भीतर लीक हो गया। सूत्रों का कहना है कि अंत में शूटर को अतिरिक्त बड़ी रकम देने पर सहमति बनी थी।

क्या हादी की हत्या में भारत का हाथ?

इस घटनाक्रम का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि कुछ दिन पहले हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश की गई थी। आरोप था कि आरोपी भारत भाग गए हैं और मेघालय में छिपे हुए हैं, लेकिन बांग्लादेश ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया।

यूनुस प्रशासन मिलीभगत की आशंका

इसके बाद आरोपियों के दुबई भागने की कहानी बनाई गई, लेकिन इस संबंध में भी कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया। इससे पहले भी पहले भी न्यूज18 ने यह बताया था कि यदि आरोपी विदेश गए, तो इसमें यूनुस प्रशासन की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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