
मोहम्मद यूनुस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Legal Cases Against Muhammad Yunus: बांग्लादेश में हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना को वापस लाने की मांग की। वहीं इस फैसले का स्वागत करते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
हालांकि, यूनुस पर खुद भी गंभीर आरोप लगे हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता होने के बावजूद उनके खिलाफ गबन, मनी लॉन्ड्रिंग और श्रम कानून उल्लंघन जैसे आरोप दर्ज हैं। यहां तक कि अदालत ने उनकी दूरसंचार कंपनी के श्रमिक कल्याण कोष से 2.2 मिलियन डॉलर के गबन का मामला दर्ज किया था।
यूनुस और उनके ग्रामीण बैंक ने 2006 में बांग्लादेश के गरीबों को 100 डॉलर से कम के माइक्रोक्रेडिट लोन देकर लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीता था। वहीं, उनके व्यवसायिक हितों में ग्रामीण टेलीकॉम भी शामिल है, जो नॉर्वे की टेलीनॉर की सहायक कंपनी और बांग्लादेश की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी ग्रामीणफोन में 34.2% हिस्सेदारी रखती है।
उन्हें ऋण वसूली में उच्च ब्याज दर, आक्रामक तरीकों का इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना भी करना पड़ा। 2010 में एक डेनिश डॉक्यूमेंट्री ने यूनुस और उनके बैंक पर नॉर्वेजियन एजेंसी फॉर डेवलपमेंट कोऑपरेशन (NORAD) से प्राप्त लगभग 100 मिलियन डॉलर के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
यूनुस को श्रम कानून उल्लंघन के लिए 2010 में छह महीने की कैद की सजा भी सुनाई गई थी, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। उनके खिलाफ 100 से अधिक मामले हैं, जिनके बारे में उन्होंने मीडिया से कहा कि ये “बहुत हल्के, मनगढ़ंत किस्से” हैं।
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इसके अलावा उन्हें 2011 में सरकारी सेवानिवृत्ति नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक पद से हटाया गया था। 2013 में सरकार की अनुमति के बिना धन प्राप्त करने का मामला भी दर्ज हुआ, जिसमें उनके नोबेल पुरस्कार और किताब से प्राप्त रॉयल्टी शामिल थी। यूनुस को उनकी अन्य कंपनियों के मामलों में भी जांच का सामना करना पड़ा, जिसमें ग्रामीण टेलीकॉम और ग्रामीणफोन भी शामिल हैं। 2015 में, बांग्लादेश के राजस्व अधिकारियों ने उन पर 1.51 मिलियन डॉलर करों का भुगतान न करने का आरोप लगाया।






