टाइम पर चुनाव नहीं हुआ तो..अवामी लीग के बढ़ते कद से यूनुस परेशान, भारत में बैठीं हसीना मे उड़ाई नींद

Bangladesh News: ढाका लॉकडाउन में अवामी लीग सफल रही, आम जनता यूनुस सरकार से मोहभंग हुई, यूनुस घबराया, शेख हसीना का केस और विदेशी मीडिया समर्थन अवामी लीग की लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं।
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अवामी लीग के उभार से यूनुस सरकार परेशान (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bangladesh Politics: बांग्लादेश के अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने हाल ही में ढाका लॉकडाउन का ऐलान किया था, और इस कोशिश में वह काफी हद तक सफल भी रही। बहुत से लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले और सड़कों पर यातायात भी कम हो गया। उसी दिन, अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने जुलाई चार्टर का जिक्र किया और फरवरी में होने वाले चुनावों की बात की। लेकिन इसका आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब यूनुस ने जुलाई चार्टर का जिक्र किया, तो यह उनकी घबराहट को दिखाता है। रिपोर्ट कहती है कि यूनुस को यह महसूस होने लगा है कि अवामी लीग का कद बढ़ रहा है। उसी दिन, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ एक केस का फैसला आना था। इस माहौल को देखते हुए यूनुस प्रशासन ने अपनी मौजूदगी का एहसास कराने की कोशिश की।

आम जनता का यूनुस सरकार से मोहभंग

रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका लॉकडाउन की सफलता ने बांग्लादेश के आम लोगों में यूनुस सरकार के प्रति मोहभंग का संकेत दिया है। लोगों ने उस राजनीति को नकार दिया है, जिसने अवामी लीग की सत्ता को चुनौती दी थी। यह स्थिति अब बदल चुकी है, और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी समेत अन्य राजनीतिक दल भी यह समझ चुके हैं। वे लॉकडाउन की सफलता से चौंके हुए हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि शेख हसीना पर फैसला 17 नवंबर को सुनाया जाएगा। हाल के महीनों में यूनुस शासन और उनके नेताओं ने जो सार्वजनिक बयान दिए हैं, उनसे यह साफ हो गया है कि यह फैसला हसीना के पक्ष में हो सकता है। हालांकि, अब आम जनता और अवामी लीग को इस फैसले की ज्यादा चिंता नहीं है।

घबराहट में अंतरिम सरकार

लॉकडाउन की सफलता ने यह साबित किया है कि यूनुस शासन घबराया हुआ है और अवामी लीग के बढ़ते प्रभाव से डर रहा है। इसके अलावा, शेख हसीना के बारे में विदेशी मीडिया के सकारात्मक साक्षात्कार और बांग्लादेश में यूनुस शासन के खिलाफ आवाज़ उठाने से अवामी लीग की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। इस बीच, यूनुस शासन के आत्मविश्वास में कमी आई है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उनके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं, और मानवाधिकार संगठनों ने उनके कृत्यों की आलोचना की है।

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