दिल्ली में RAW से मुलाकात, फिर इस्लामाबाद में ISI संग बैठक; बांग्लादेशी खुफिया प्रमुख के दौरे ने बढ़ाई हलचल
Bangladesh Intelligence Chief मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने दिल्ली में RAW प्रमुख और NSA से गुप्त मुलाकात के बाद अब इस्लामाबाद में ISI अधिकारियों से मुलाकात की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी, तारिक रहमान और मुनीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Intelligence Chief Pakistan Visit: पड़ोसी देश बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद से ही वहां की विदेश और रक्षा नीतियों में बड़े और चौंकाने वाले बदलाव देखे जा रहे हैं। ढाका की नई सत्ता एक तरफ जहां भारत के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का दिखावा कर रही है।
वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के साथ अपने रणनीतिक और सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश में है। इस रणनीतिक खेल का सबसे बड़ा उदाहरण बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी DGFI के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी के हालिया दौरे हैं।
Intelligence Chief का अघोषित दिल्ली दौरा
मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने हाल ही में नई दिल्ली का भी दौरा किया था। आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को ‘मेडिकल चेकअप’ का नाम दिया गया। लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, भारतीय खुफिया एजेंसी (R&AW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक (DGMI) लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन के साथ अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा वार्ताओं में हिस्सा लिया। माना जा रहा है कि इस मुलाकात का उद्देश्य भारत की सुरक्षा चिंताओं, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को लेकर नई दिल्ली को आश्वस्त करना था।
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दिल्ली के बाद इस्लामाबाद की ‘सीक्रेट’ उड़ान
भारत दौरे के ठीक एक महीने बाद, मेजर जनरल चौधरी अपने अन्य अधिकारियों के साथ बैंकॉक होते हुए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गए। 1 और 2 अप्रैल के बीच हुए इस दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उन्होंने पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और अपने समकक्ष ISI के अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठकें कीं।
यह कदम स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि ढाका अब दोनों तरफ अपने सुरक्षा हितों को साधने की कोशिश कर रहा है और भारत-पाकिस्तान के साथ एक जटिल रणनीतिक संतुलन बनाने के खेल में जुटा है।
तुर्की के साथ बढ़ती सैन्य भागीदारी
इन कूटनीतिक हलचलों के बीच, बांग्लादेश की तुर्की के साथ भी सैन्य नजदीकियां बढ़ रही हैं। हाल ही में ढाका में बांग्लादेश-तुर्की की चौथी सेना स्टाफ वार्ता (AST) 2026 संपन्न हुई जिसमें रक्षा सहयोग और हथियारों की खरीद पर गहन चर्चा की गई। बांग्लादेश अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए तुर्की को एक अहम भागीदार के रूप में देख रहा है विशेष रूप से ड्रोन तकनीक और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों के आयात के लिए।
क्या ‘खिचड़ी’ पका रही है तारिक रहमान सरकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान की सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि भारत जैसे बड़े पड़ोसी के साथ तनाव मोल लेना देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है। लेकिन साथ ही, पाकिस्तान और तुर्की के साथ सैन्य स्तर पर संवाद बढ़ाकर ढाका रक्षा खरीद और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए किसी एक शक्ति पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है।
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इसके अलावा, नई सरकार बांग्लादेशी सेना के उन धड़ों को भी संतुष्ट करने की कोशिश कर रही है जो पारंपरिक रूप से पाकिस्तान या मुस्लिम देशों के साथ घनिष्ठ संबंधों के समर्थक रहे हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां वर्तमान में बांग्लादेश के इस ‘बैलेंसिंग एक्ट’ पर कड़ी नजर रख रही हैं।
