भारत में आतंक मचा सकता है इबोला! कांगो में ले चुका है 100 से अधिक जानें, जानिए कितना खतरनाक है नया स्ट्रेन?
Ebola Virus New Strain Congo: कांगो में इबोला वायरस के नए और बेहद खतरनाक स्ट्रेन से हड़कंप मच गया है। 50% मृत्यु दर वाले इस वायरस के चलते WHO ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।
- Written By: अक्षय साहू
कांगो में इबोला से 100 से अधिक लोगों की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ebola International Health Emergency WHO: दुनिया पर एक बार फिर एक बड़ा स्वास्थ्य संकट का खतरा बढ़ता जा है। इस समय अफ्रीकी महाद्वीप के देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लोग इबोला वायरस के नए और बेहद खतरनाक स्ट्रेन का सामना कर रहे हैं। यहां इबोला के नए स्ट्रेन से अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों की संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती है। कांगो के इस हालात ने दुनिया को एक बाद फिर कोरोना महामारी की याद दिला दी है।
इबोला वायरस का नए स्ट्रेन कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपातकाल घोषित करते हुए सदस्य देशों की तुंरत एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। ताकि इससे निपटने के लिए सटीक और सही रणनीति बनाई जा सके। इसके बाद से इस बात ने जोर पड़ना शुरू कर दिया कि 2020 कोविड महामारी की तरह एक बार फिर पूरी दुनिया में लॉकडाउन हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इबोला वायरस इतना खतरनाक है? क्या WHO के पास इसका कोई इलाज है? और भारत इसके लिए कितना तैयार है?
इतना खतरनाक क्यों है इबोला का नया स्ट्रेन?
WHO के मुताबिक, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में फैला इबोला वायरस का नया स्ट्रेन बेहद खतरनाक है। इससे लेकर सबसे बड़ी चिंता है कि इबोला नया स्ट्रेन पूरी तरह से नया है और यह पहले के किसी भी स्ट्रेन नहीं मिलता है। जिसे बंडी बुगो वायरस कहा जा रहा है। क्योंकि ये एकदम नया है, इसके चलते इसकी कोई वैक्सीन या पूरी तरह से असरदार इलाज मौजूद ही नहीं है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, नए स्ट्रेन की मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत है। यानी संक्रमित होने वाले दो लोगों में से एक की मौत तय है।
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कांगो में इबोला प्रकोप (सोर्स- सोशल मीडिया)
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि यह बीमारी सिर्फ अफ्रीका तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि दूसरे देशों तक भी फैल सकती है। कागों के अलावा युगांडा में भी इसके कुछ मामले सामने आए हैं, जो स्थिति को और भी खतरनाक बना देता है।
कांगो में कैसे फैला वायरस?
जानकारी के मुताबिक, इस वायरल के फैलने की शुरुआत 2026 में पूर्वी कांगो को एक मेडिकल सेंटर से हुई। जहां एक नर्स इसका शिकार हुई। क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आम मलेरिया और टाइफाइड जैसे ही थे, इसलिए डॉक्टर इसे समय पर नहीं पहचान पाए। इसके कुछ दिन बाद ही उस नर्स की मौत हो गई। जहां अंतिम संस्कार के दौरान यह दूसरे लोगों में फैलने लगा।
कांगो में कई स्वस्थ्याकर्मी इबोला के शिकार (सोर्स- सोशल मीडिया)
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ जैसे खून, पसीना, लार और उल्टी के संपर्क से फैलता है। नर्स के अंतिम संस्कार के समय परिजनों ने उसके शरीर को छूआ था। जिससे ये संक्रमण उनमें भी फैल गया और फिर उनके जरिए दूसरे लोगों में। वहीं, डॉक्टरों ने इसे पहले आम बीमारी माना और ध्यान नहीं दिया। जिसका खामियाजा ये हुआ कि इस बीमारी के शिकार होने वाले लोगों में बड़ी संख्या में वो डॉक्टर और नर्स है जो मरीजों का इलाज कर रहे थे।
1976 में सामने आया था पहला मामला
इबोला वायरस का पहला मामला 1976 में सामने आया था। इसका नाम इबोला नदी के नाम पर रखा गया था। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस वायरस का प्राकृतिक स्रोत फ्रूट बैट यानी चमगादड़ हैं। अफ्रीका के कई हिस्सों में जंगली जानवरों का मांस खाने की परंपरा रही है, जिसे वायरस के इंसानों तक पहुंचने का एक बड़ा कारण माना जाता है। 2014 में इबोला का सबसे खतरनाक प्रकोप देखा गया था। उस दौरान 28,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और करीब 11,000 लोगों की मौत हुई थी।
इतिहास में हजारों जानें ले चुका है इबोला (सोर्स- सोशल मीडिया
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भारत के लिए कितनी खतरनाक है स्थिति
भारत के नजरिए से राहत की बात ये है कि 2026 में इबोला का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर देश के सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी है। खास तौर पर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की पहचान कर उनकी ट्रैवल हिस्ट्री जांची जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध मरीज को तुरंत अलग किया जा सके।
