बांग्लादेश में सनसनी! पूर्व आर्मी चीफ की चटगांव क्लब में संदिग्ध हालात में मौत, मचा हड़कंप

Bangladesh News in hindi: बांग्लादेश के पूर्व सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एम. हारुन-उर-रशीद का सोमवार को निधन हो गया। उनका शव चटगांव क्लब परिसर में मिला।
बांग्लादेश में सनसनी! पूर्व आर्मी चीफ की चटगांव क्लब में संदिग्ध हालात में मौत, मचा हड़कंप
बांग्लादेश के पूर्व आर्मी चीफ की चटगांव क्लब में संदिग्ध हालात में मौत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bangladesh Former Army Chief: बांग्लादेश के पूर्व सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड एम. हारुन अर रशीद का निधन हो गया है। उनका शव चटगांव क्लब के एक कमरे से मिला है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 77 वर्षीय सेना प्रमुख रविवार को ढाका से चटगांव अदालत की एक सुनवाई में शामिल होने के लिए आए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की है।

अधिकारी ने बताया कि जब पूर्व सेना प्रमुख निर्धारित समय पर अदालत नहीं पहुंचे और उनके फोन का कोई जवाब नहीं मिला, तो क्लब के अधिकारियों ने उनके कमरे की जांच की। वहां उन्हें रशीद का शव मिला।

घटना की जांच शुरू

हारुन डेस्टिनी ग्रुप नामक कंपनी से जुड़े एक घोटाले की सुनवाई के लिए चटगांव अदालत आए थे। वे इस कंपनी के चेयरमैन भी रहे थे। उनके शव को कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया। कोतवाली पुलिस स्टेशन के प्रभारी अब्दुल करीम के अनुसार, उनका शव सोमवार सुबह करीब 10 बजे मिला था। इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है।

मृत्यु के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं

पुलिस ब्यूरो और सीआईडी की टीमें घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटा रही हैं। बता दें कि पूर्व सेना प्रमुख की मृत्यु के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, पुलिस और परिजनों का मानना है कि उनकी मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने व्यापारिक गतिविधियों में कदम रखा था। उन पर कई वित्तीय घोटालों में संलिप्तता के आरोप सिद्ध हो चुके हैं।

बांग्लादेश सेना के प्रमुख के रूप में दी सेवा

हारुन अर रशीद को 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता सम्मान 'बीर बिक्रम' प्रदान किया गया। उन्होंने दिसंबर 2000 से जून 2002 तक बांग्लादेश सेना के प्रमुख के रूप में सेवा दी। बांग्लादेश के एक रक्षा विश्लेषक ने बताया, "एक युवा लेफ्टिनेंट के रूप में हारुन ने करीब से देखा कि 1970 के चुनाव में जीत हासिल करने के बावजूद पाकिस्तानी सरकार अवामी लीग को सत्ता सौंपने को बिल्कुल तैयार नहीं थी।"

मार्च 1971 की शुरुआत में ही उन्हें इस बात का आभास हो गया था कि पाकिस्तानी सेना बंगालियों के खिलाफ कोई गंभीर और खतरनाक साजिश रच रही है। उन्होंने आगे कहा, "अक्टूबर 1971 में लेफ्टिनेंट हारुन ने नवगठित 9वीं ईस्ट बंगाल रेजिमेंट के साथ मिलकर कस्बा में हुए भीषण युद्ध में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपनी कंपनी का नेतृत्व किया।"

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