- Hindi News »
- World »
- Bangladesh Elections Female Representation Low Participation Patriarchy Political Update
Bangladesh Elections में महिलाओं की भारी अनदेखी… रिपोर्ट में 4.2% भागीदारी और पितृसत्ता का बड़ा खुलासा
Female Election Representation: बांग्लादेश के आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी मात्र 4.2 प्रतिशत है। पितृसत्ता और राजनीतिक दलों की बेरुखी ने महिला उम्मीदवारों की संख्या को काफी कम कर दिया है।
- Written By: प्रिया सिंह

बांग्लादेश चुनाव में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सिर्फ 4.2% (सोर्स-सोशल मीडिया)
Low Female Political Participation Bangladesh: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आगामी चुनावों को लेकर जारी रिपोर्टों ने देश के राजनीतिक ढांचे में गहरी पितृसत्ता को उजागर किया है। कुल नामांकन पत्रों में महिलाओं की संख्या उम्मीद से काफी कम पाई गई है जो लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाती है। बांग्लादेश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी कम के इस गंभीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के पूर्व निदेशक सलीम जहान ने विस्तार से प्रकाश डाला है। इस चुनावी माहौल में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका देने के बजाय मुख्यधारा की राजनीति से काफी दूर रखा जा रहा है।
सलीम जहान की रिपोर्ट के अनुसार 12 फरवरी को होने वाले चुनावों के लिए कुल 2,568 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं। इनमें से केवल 109 महिला उम्मीदवार ही मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए सामने आई हैं जो एक बहुत ही छोटी संख्या है। यह कुल उम्मीदवारों का महज 4.2 प्रतिशत है जो कि देश की आधी महिला आबादी के लिहाज से अत्यंत निराशाजनक माना जा रहा है।
दलों के समर्थन का अभाव
इन 109 महिला उम्मीदवारों में से केवल 72 को ही विभिन्न राजनीतिक दलों का आधिकारिक समर्थन और टिकट प्राप्त हो सका है। बाकी बची 37 महिलाएं निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें अपनी ही पार्टी से कोई सहयोग नहीं मिला। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि हर तीन में से एक महिला उम्मीदवार को किसी भी दल का समर्थन प्राप्त नहीं हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
Iran US Talks: अराघची के पाकिस्तान पहुंचते ही ईरान ने कहा अमेरिका के साथ नहीं होगी कोई बातचीत
कुवैत सीमा पर इराक से बड़ा ड्रोन हमला: उत्तरी चौकियों को बनाया निशाना, क्या फिर मंडरा रहा है युद्ध का खतरा?
2030 तक अमेरिका को पछाड़ देगा चीन, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बनेगा नया ‘सुपरपावर’
बांग्लादेश में बड़ा आतंकी प्लान फेल, संसद भवन और सेना मुख्यालय समेत कई ठिकाने थे निशाने पर; हाई अलर्ट जारी
राजनीतिक दलों की बेरुखी
आगामी चुनावों में देश की कुल 50 राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले रही हैं जिनमें से 30 ने एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है। रिपोर्ट बताती है कि देश की तीन-पांचवीं राजनीतिक पार्टियों ने किसी भी योग्य महिला को टिकट देने की जरूरत नहीं समझी। यह स्थिति तब है जब बांग्लादेश की कुल आबादी का आधे से अधिक हिस्सा महिलाएं ही हैं जिसे रिपोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण कहा है।
प्रमुख दलों का प्रदर्शन
महिला उम्मीदवार उतारने वाली पार्टियों में BNP और मार्क्सवादी BSP सबसे ऊपर हैं लेकिन उनके आंकड़े भी बहुत अच्छे नहीं हैं। इन दोनों ही प्रमुख दलों ने केवल 10-10 महिला उम्मीदवारों को ही चुनावी मैदान में उतारने का फैसला लिया है। BNP जैसी जमीनी पार्टी द्वारा 328 उम्मीदवारों में सिर्फ 10 महिलाओं (करीब 3 प्रतिशत) को शामिल करना बहुत निराशाजनक है।
कट्टरपंथी दलों का रवैया
कट्टरपंथी विचारधारा रखने वाली इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी का रिकॉर्ड महिलाओं की भागीदारी के मामले में सबसे अधिक खराब रहा है। इस दल ने आगामी चुनावों के लिए अपने कुल 279 उम्मीदवारों में से एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है। यह दर्शाता है कि कुछ दलों की मूल विचारधारा में महिलाओं के लिए सक्रिय राजनीतिक स्थान अभी भी उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि दलों के बीच चुनाव में कम से कम पांच प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारने की सहमति बनी थी। हालांकि प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश राजनीतिक दल इस बुनियादी प्रतिबद्धता और वादे को पूरा करने में बुरी तरह विफल रहे हैं। राजनीतिक सुधारों के दावों के बावजूद महिलाओं की उपेक्षा करना अब बांग्लादेशी राजनीति की एक सामान्य परंपरा बन गई है।
सामाजिक बाधाएं और पितृसत्ता
बांग्लादेश की राजनीति आज भी पूरी तरह से पुरुष-प्रधान बनी हुई है जहां पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचा महिलाओं को हतोत्साहित करता है। समाज महिलाओं को सार्वजनिक रैलियों, प्रचार अभियानों और नेतृत्व की सक्रिय भूमिकाओं में देखने का बिल्कुल भी आदी नहीं है। इसके चलते सक्रिय राजनीति में महिलाओं की रुचि और भागीदारी बहुत सीमित स्तर पर बनी हुई है जो चिंताजनक है।
राजनीति में बढ़ता ‘मसल पावर’ यानी बाहुबल का प्रभाव भी महिलाओं को उम्मीदवार बनने से बड़े पैमाने पर हतोत्साहित करता है। चुनावों के दौरान हिंसा और शारीरिक बल का पारंपरिक उपयोग महिलाओं के लिए एक असुरक्षित और कठिन माहौल पैदा करता है। इस डर के कारण कई योग्य महिलाएं चुनावी प्रक्रिया का सीधा हिस्सा बनने के बजाय खुद को इससे दूर रखती हैं।
यह भी पढ़ें: भारत का बड़ा एक्शन! पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश पर सख्ती, ढाका से राजनयिक परिवारों की वापसी के आदेश
भविष्य के सुधार
यह कहा जा सकता है कि बांग्लादेश को अपनी लोकतांत्रिक जड़ों को मजबूत करने के लिए अधिक समावेशी होना पड़ेगा। जब तक राजनीतिक दल और समाज महिलाओं को बराबर का मौका नहीं देंगे तब तक पूर्ण सामाजिक विकास संभव नहीं है। आने वाले समय में चुनावी सुधारों के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
Frequently Asked Questions
-
Que: बांग्लादेश के आगामी चुनावों में महिलाओं की कुल भागीदारी कितनी है?
Ans: कुल 2,568 नामांकन पत्रों में से केवल 109 महिला उम्मीदवार हैं, जो कुल संख्या का महज 4.2 प्रतिशत है।
-
Que: कितनी राजनीतिक पार्टियों ने एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया?
Ans: कुल 50 हिस्सा लेने वाली पार्टियों में से 30 राजनीतिक दलों ने एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है।
-
Que: BNP ने कितनी महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है?
Ans: बीएनपी ने अपने 328 उम्मीदवारों में से केवल 10 महिलाओं को टिकट दिया है, जो कुल का लगभग 3 प्रतिशत है।
-
Que: जमात-ए-इस्लामी पार्टी का महिला उम्मीदवारों को लेकर क्या रिकॉर्ड है?
Ans: जमात-ए-इस्लामी ने अपने 279 उम्मीदवारों में से एक भी महिला को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया है।
-
Que: महिलाओं को राजनीति में आने से कौन से कारक सबसे अधिक रोकते हैं?
Ans: पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचा, रैलियों में कम प्रतिनिधित्व और 'मसल पावर' की राजनीति मुख्य बाधाएं हैं।
Bangladesh elections female representation low participation patriarchy political update
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
Sanjay Gaikwad Son: बाप शेर तो बेटा सवा शेर! विधायक संजय गायकवाड़ के बेटे की कार के बोनट पर चढ़कर गुंडागर्दी?
Apr 25, 2026 | 10:08 AMनागपुर नागरिक सहकारी बैंक का विस्तार, मेहकर शाखा शुरू; विलय के बाद बैंकिंग सेवाओं को नई मजबूती
Apr 25, 2026 | 10:05 AMMumbai Voter List SIR: मुंबई में मतदाता सूची अपडेट के लिए SIR अभियान तेज, आयुक्त अश्विनी भिड़े ने मांगा सहयोग
Apr 25, 2026 | 10:04 AMमऊ में बेटी की शादी से लौट रहे परिवार की स्कॉर्पियो के उड़े परखच्चे, 5 लोगों और पालतू कुत्ते की दर्दनाक मौत
Apr 25, 2026 | 09:51 AMChhatrapati Sambhajinagar मनपा का विदेशी दौरा विवादों में, 1600 करोड़ का कर्ज और 40 लाख का टूर
Apr 25, 2026 | 09:45 AMUK Board Result Out: उत्तराखंड बोर्ड 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित, इन 3 आसान तरीकों से चेक करें अपना रिजल्ट
Apr 25, 2026 | 09:40 AMMaharashtra Employee Strike: पेंशन योजना पर सहमति, 27 अप्रैल से सरकारी दफ्तरों में लौटेगी सामान्य व्यवस्था
Apr 25, 2026 | 09:37 AMवीडियो गैलरी

UP News: मेरठ का तुषार कैसे बना ‘हिजबुल्लाह’? मोबाइल और इंस्टाग्राम ने बनाया आतंकी
Apr 24, 2026 | 10:28 PM
PM मोदी के हुगली दौरे के बाद क्या बदला माहौल? महिलाओं ने सुरक्षा पर उठाए सवाल, युवाओं ने मांगा रोजगार
Apr 24, 2026 | 10:23 PM
संदीप पाठक के पास थे सिर्फ 3 रास्ते…जानें IIT प्रोफेसर ने AAP छोड़ क्यों चुना BJP का साथ? देखें VIDEO
Apr 24, 2026 | 10:12 PM
पहाड़ों पर ₹80 की पानी की बोतल का सच: क्या यह लूट है या मजबूरी? हकीकत जानकर दंग रह जाएंगे
Apr 24, 2026 | 10:09 PM
UP बोर्ड में लड़कियों की बादशाहत! टॉपर्स लिस्ट में केवल एक लड़का, कशिश और शिखा वर्मा ने किया प्रदेश का नाम रोशन
Apr 24, 2026 | 02:04 PM
‘तुम यहां क्या कर रहे हो…?’, केदारनाथ धाम में मुस्लिम के साथ गाली-गलौज, VIDEO हुआ वायरल
Apr 23, 2026 | 10:43 PM














