Explainer: पाकिस्तान की नाक में दम करने वाला JAAC क्या है, PoK में मचे कोहराम को कैसे दे रहा खाद-पानी?

Joint Awami Action Committee: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इन दिनों काफी खून-खराबा देखने को मिल रहा है। सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 53 से अधिक लोगों मारे जा चुके हैं।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके में क्यों मचा कोहराम, (सोर्स- AI)
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What is Joint Awami Action Committee: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों खून-खराबे की स्थिति बनी हुई है। पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरी आम जनता पर बर्बरता की सभी हदें पार की जा रही हैं। पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को देखते ही गोली मारने (शूट एट साइट) का आदेश दे दिया है। इसका असर यह देखने को मिला की पूरे पीओके में तनाव का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों पर नजर रखने के लिए पाकिस्तान सेना की कई टीमों की तैनाती कर दी गई है।

मुजफ्फराबाद में सुरक्षाबल और पुलिस की तरफ से की गई गोलीबारी में अब तक 53 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। जबकि, 200 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। हालांकि, असल आंकड़े क्या है, इसको लेकर कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है। पीओके में शुक्रवार को शुरू हुई इस खूनी खेल के बारे में लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह सबकुछ क्यों हो रहा है? वहीं, इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही ‘जॉइंट अवामी ऐक्शन कमेटी’ (JAAC) क्या है। आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए सबकुछ विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

क्या है जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी?

जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी, जिसे आमतौर पर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नाम से जाना जाता है। यह पाकिस्तान शासित आजाद जम्मू और कश्मीर (AJK) में स्थित एक जमीनी स्तर का सिविल सोसाइटी गठबंधन और सोशियो-पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन है। इसमें व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील, छात्र और अन्य नागरिक समूह शामिल हैं, जो आर्थिक और शासन की मांगों पर दबाव डालते हैं। इस  संगठन की स्थापना 2023 में की गई थी। अपनी स्थापना के बाद से जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी आजाद कश्मीर सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले किए हैं।

पीओके में इस संगठन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए 5 जून 2026 को आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, JAAC ने कथित तौर पर पहले भी पुलिस के साथ झड़प की है। इसके अलावा संगठन पर  स्थानीय पुलिसकर्मियों को मारने, अपहरण करने और प्रताड़ित करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग

JAAC आंदोलन 38-पॉइंट के एक बड़े चार्टर ऑफ डिमांड्स से चलता है। इन मांगों को दो मुख्य एरिया में बांटा गया है।

पहला: तुरंत आर्थिक राहत और लंबे समय के स्ट्रक्चरल बदलाव। आर्थिक तौर पर, JAAC आजाद जम्मू-कश्मीर कंज्यूमर्स के लिए बिजली के टैरिफ में काफी कमी की मांग करता है, जिसका कैलकुलेशन मंगला डैम जैसे लोकल हाइड्रो-प्रोजेक्ट्स से पैदा होने वाली बिजली की प्रोडक्शन कॉस्ट के आधार पर किया जाए, और पड़ोसी गिलगित-बाल्टिस्तान में मिलने वाले गेहूं के आटे के बराबर सब्सिडी वाली कीमतें दी जाएं।

दूसरा: स्ट्रक्चर के हिसाब से आंदोलन पॉलिटिकल एलीट और ब्यूरोक्रेसी को मिलने वाले भत्ते और खास अधिकार खत्म करने और आजाद जम्मू कश्मीर लेजिस्लेटिव असेंबली में 12 सीटों को हटाने पर विशेष जोर देता है। फिलहाल यह भारत शासित जम्मू और कश्मीर से पाकिस्तान में रहने वाले रिफ्यूजी के लिए रिजर्व हैं।

पाकिस्तान के PoK में फिर क्यों भड़की हिंसा?

2023 से अपनी मागों को लेकर सरकार पर हमलावर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने जून 2026 में फिर से सड़कों पर उतरी। ये विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से JAAC ने आयोजित किए थे। इसका वजह पाकिस्तान में रहने वाले भारत शासित जम्मू और कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आजाद जम्मू और कश्मीर विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों के विरोध के कारण शुरू हुए थे। सरकार द्वारा JAAC पर बैन लगाने और उसके बाद उसके नेतृत्व के खिलाफ सुरक्षा ऑपरेशन के बाद अशांति बढ़ गई।

संगठन 2024 में बिजली के टैरिफ, आटे की सब्सिडी और सरकारी खर्च को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान आजाद कश्मीर में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन के रूप में उभरी। उन विरोध प्रदर्शनों के बाद, संगठन ने संवैधानिक और राजनीतिक सुधारों को शामिल करने के लिए अपने एजेंडे को बढ़ाया।

मुजफ्फराबाद में हुए प्रोटेस्ट में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होते JAAC समर्थक, (सोर्स- सोशल मीडिया)
मुजफ्फराबाद में हुए प्रोटेस्ट में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होते JAAC समर्थक, (सोर्स- सोशल मीडिया)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फैली अशांति

JAAC की मुख्य मांगों में से एक भारत शासित जम्मू और कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करना था। JAAC ने तर्क दिया कि आजाद कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को इलाके की विधानसभा के प्रतिनिधियों के चुनाव में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। जून 2026 की शुरुआत में आजाद जम्मू और कश्मीर के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रिफ्यूजी सीटें संवैधानिक ढांचे के तहत सुरक्षित हैं और संविधान में बदलाव के बिना उन्हें खत्म नहीं किया जा सकता। फैसले के बाद JAAC ने विरोध प्रदर्शन और मुजफ्फराबाद की ओर एक लंबे मार्च की घोषणा की। सरकार ने बाद में JAAC को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया और इसके कई नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

हिंसा में अब तक 53 लोगों की मौत

8 जून 2026 को रावलकोट और दूसरी जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं और हड़तालें कीं। जबकि अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों को तैनात किया। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशांति के दौरान कम से कम 53 लोग मारे गए और सैकड़ो घायल हुए। ज्यादातर मौतें पुंछ जिले के रावलकोट में टकराव के दौरान हुईं। 9 जून 2026 को JAAC ने पूरे इलाके में हड़ताल का ऐलान किया। मुजफ्फराबाद, पुंछ, बाग और मीरपुर समेत कई जिलों में कमर्शियल सेंटर, ट्रांसपोर्टेशन सर्विस और मार्केट बंद रहे। पूरे इलाके में सिक्योरिटी बढ़ा दी गई।

'अशांति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक'

आजाद जम्मू और कश्मीर सरकार ने अपने कामों का बचाव करते हुए कहा कि पब्लिक ऑर्डर बनाए रखने और संवैधानिक संस्थाओं को बनाए रखने के लिए ये जरूरी हैं। अधिकारियों ने पाबंदियां लगाईं, गिरफ्तारियां कीं और कई JAAC नेताओं के खिलाफ वारंट जारी किए।ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने प्रोटेस्टर्स के खिलाफ बल प्रयोग, एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी और कम्युनिकेशन पर पाबंदियों को लेकर चिंता जताई। पॉलिटिकल कमेंटेटर्स ने इन प्रोटेस्ट को हाल के सालों में आजाद कश्मीर में नागरिक अशांति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बताया।

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