
शेख हसीना के बांग्लादेश चुनाव का समीकरण, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Elections News In Hindi: दक्षिण एशिया का अहम देश बांग्लादेश इस समय एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा है। 1971 में स्वतंत्रता के बाद से लोकतंत्र, सैन्य शासन और तानाशाही के विभिन्न दौर देखने वाले इस देश में अब ‘अवामी लीग’ के बिना सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध के कारण इस बार का चुनावी परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है और मैदान में नई राजनीतिक ताकतें उभरकर सामने आई हैं।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को वर्तमान में देश की सबसे बड़ी सियासी ताकत माना जा रहा है। 1978 में स्थापित यह पार्टी राष्ट्रवाद और इस्लामी मूल्यों का समर्थन करती है। पार्टी की दिग्गज नेता बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद अब उनके बेटे तारिक रहमान ने कमान संभाली है। BNP वर्तमान में 10 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है और अवामी लीग की अनुपस्थिति में उसे जीत का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। तारिक रहमान के सामने अपनी मां की राजनीतिक विरासत को सहेजने और पार्टी को सत्ता दिलाने की बड़ी चुनौती है।
BNP को कड़ी टक्कर देने के लिए शफीकुर रहमान के नेतृत्व में जमात-ए-इस्लामी पूरी ताकत झोंक रही है। शरिया आधारित शासन की वकालत करने वाली इस पार्टी ने इस बार चौंकाने वाला फैसला लेते हुए पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार, कृष्णा नंदी को मैदान में उतारा है। जमात 11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है जिसमें नई नवेली नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) भी शामिल है। हालांकि 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान समर्थक होने के कारण इसकी छवि विवादित रही है लेकिन हाल के वर्षों में इसका जनाधार बढ़ा है।
फरवरी 2025 में गठित नेशनल सिटीजन पार्टी इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू है। 2024 के छात्र आंदोलन से निकले चेहरे नाहिद इस्लाम इस पार्टी के प्रमुख नेता हैं। यह मुख्य रूप से छात्रों और युवाओं का दल है जिसने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ हाथ मिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाहिद इस्लाम की अगुवाई में यह पार्टी ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में युवा मतदाता इनसे जुड़े हुए हैं।
यह भी पढ़ें:- इजरायल हमें आसानी से…, हमास नेता खालिद मशाल की ट्रंप को सीधी चुनौती, कहा- नहीं छोड़ेंगे हथियार
इसके अलावा पूर्व सैन्य शासक इरशाद द्वारा स्थापित जातीय पार्टी भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है हालांकि इरशाद के निधन के बाद यह पहले के मुकाबले कमजोर हुई है। बांग्लादेश में कुल 50 से अधिक रजिस्टर्ड दल छोटे-छोटे गठबंधनों में शामिल होकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं जिससे यह चुनाव और भी बहुकोणीय हो गया है।






