तारिक रहमान, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Tarique Rahman Bangladesh Election Win: बांग्लादेश की राजनीतिक फिजा में दो दशकों के बाद एक बड़ा बदलाव आया है। 13 फरवरी, 2026 को आए चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में शानदार वापसी कर ली है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 सदस्यीय संसद में बीएनपी ने 151 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर ‘पूर्ण बहुमत’ हासिल कर लिया है। यह जीत बीएनपी के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पार्टी करीब 20 साल बाद फिर से देश की कमान संभालने जा रही है।
17 साल के लंबे निर्वासन के बाद वतन लौटे तारिक रहमान के लिए यह चुनाव व्यक्तिगत रूप से भी एक बड़ी जीत साबित हुआ है। उन्होंने दो महत्वपूर्ण सीटों बोगुरा-6 और ढाका-17 पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है। ढाका-17 सीट पर उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को 4,399 वोटों से हराया।
जीत की आधिकारिक घोषणा के बीच खबर यह भी मिली है कि तारीक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। संसद परिसर में शपथ समारोह की तैयारियां पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। अपनी इस बड़ी सफलता के बाद रहमान ने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है और फिलहाल किसी भी विजय रैली के बजाय जुमे की नमाज के बाद दुआ करने का निर्देश दिया है।
बीएनपी की इस जीत पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारीक रहमान को फोन पर बधाई दी और कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर अटूट भरोसे को दर्शाती है। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि भारत एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के साथ मिलकर साझा विकास लक्ष्यों पर काम करना जारी रखेगा। इसके साथ ही अमेरिका और पाकिस्तान के नेतृत्व ने भी चुनाव को सफल बताते हुए रहमान को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।
बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, इस 13वें संसदीय चुनाव में कुल 60.69% मतदान दर्ज किया गया। इस बार संसद में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है, जहां सात महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की जिनमें से छह बीएनपी के टिकट पर संसद पहुंची हैं। इनमें अफरोजा खान रीता और बैरिस्टर रूमिन फरहाना जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
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आम चुनाव के साथ-साथ देश में ‘जुलाई चार्टर’ के तहत एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह भी हुआ जिसमें द्विसदनीय संसद और पीएम कार्यकाल की सीमा जैसे संवैधानिक सुधारों पर जनता की राय मांगी गई थी। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश मतदाता ‘पिंक बैलट पेपर’ के सिस्टम को लेकर असमंजस में थे और तकनीकी जटिलताओं के कारण इसे समझने में उन्हें काफी चुनौती का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, अवामी लीग के सजीब वाजेद जॉय ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी लोकतंत्र की बहाली के लिए बीएनपी के साथ संपर्क साधने को तैयार है।