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AI का खौफ! बांग्लादेश में महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं को डीपफेक से बनाया जा रहा निशाना, जानिए क्या है सच
Bangladesh Deepfake AI: बांग्लादेश में AI-जनित डीपफेक के जरिए महिलाओं को निशाना बनाने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। राजनेताओं से लेकर छात्रों तक को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
- Written By: अमन उपाध्याय

सांकेतिक फोटो (सो, सोशल मीडिया)
Bangladesh Deepfake AI Violence News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के इस दौर में बांग्लादेश से एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। देश में महिलाओं के खिलाफ तकनीक के गलत इस्तेमाल में लगातार और खतरनाक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आपत्तिजनक कंटेंट पर महिलाओं के चेहरे लगाकर उन्हें बदनाम करने और समाज से अलग-थलग करने के लिए डीपफेक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर उन महिलाओं पर पड़ रहा है जो अपने हक के लिए आवाज उठाना जानती हैं।
इज्जत की दुहाई और जान का खतरा
बांग्लादेशी समाज में डिजिटल शर्म और ‘परिवार की इज्जत’ जैसे सामाजिक ढांचे का अपराधी बखूबी फायदा उठा रहे हैं। डीपफेक की वजह से न केवल पीड़ित की छवि खराब हो रही है बल्कि पूरे परिवार को भारी मानसिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में पीड़ित महिलाएं और उनके परिवार खुद को सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह काट लेते हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि डिजिटल कलंक के कारण कुछ पीड़ित अपनी जान तक देने पर मजबूर हो गए हैं। एक मामले में, एक महिला ने तब आत्महत्या कर ली जब उसका एक एआई-संपादित वीडियो उसके परिवार के साथ साझा किया गया था।
छात्रों से लेकर मंत्रियों तक हर कोई निशाने पर
डीपफेक के शिकार होने वालों में किसी एक वर्ग की महिलाएं नहीं हैं। इसमें छात्र, कार्यकर्ता, राजनेता, अभिनेत्रियां और पेशेवर महिलाएं भी शामिल हैं। राजशाही यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ‘रिया’ (नाम परिवर्तित) का मामला काफी चर्चा में रहा, जिसका चेहरा आपत्तिजनक कंटेंट में लगाकर स्टूडेंट नेटवर्क में फैला दिया गया।
इस घटना के बाद उन पर छात्र संगठनों से इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया और उनकी पढ़ाई तक रुकने की नौबत आ गई। इसी तरह, 2025 की शुरुआत में पर्यावरण मंत्रालय की पूर्व सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन को भी ‘केमिकल अली’ नामक एक अकाउंट के जरिए निशाना बनाया गया था, जो जानी-मानी महिलाओं को टारगेट करने के लिए कुख्यात है।
ब्लैकमेलिंग का नया तरीका
रिपोर्टों से पता चलता है कि डीपफेक करने वाले अक्सर पीड़ित के परिचित या ऑनलाइन संपर्क में आए लोग ही होते हैं। ये अपराधी सोशल मीडिया से फोटो डाउनलोड करते हैं और एआई टूल्स का उपयोग करके आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीरें तैयार करते हैं। इसके बाद पीड़ित को धमकी दी जाती है कि यदि पैसे नहीं दिए गए या उनकी बात नहीं मानी गई तो यह कंटेंट उनके परिवार, कॉलेज या एम्प्लॉयर को भेज दिया जाएगा।
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सार्वजनिक जीवन से बाहर करने की साजिश
ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘वॉइस’ की एक स्टडी के अनुसार, महिला कार्यकर्ताओं और सलाहकारों के खिलाफ ये डिजिटल हमले केवल उन्हें बेइज्जत करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से बाहर करने के उद्देश्य से किए जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश में लगभग 89 प्रतिशत महिला सोशल मीडिया यूजर्स ने कम से कम एक बार ऑनलाइन हिंसा का सामना किया है। यह स्थिति डिजिटल विकास और सुरक्षा के बीच एक बड़ी खाई को दर्शाती है।
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