मारे गए सैनिकों के शरीर से स्पर्म निकाल रहा इजरायल, खुलासे से मचा हड़कंप, वजह जानकर चकरा जाएगा माथा

Israel News: इजरायल में युद्ध के बाद पोस्ट ह्यूमस स्पर्म रिट्रीवल तेजी से बढ़ी। 24–72 घंटे में स्पर्म निकालना सफल होता है, ज्यादातर आवेदन माता-पिता द्वारा परिवार की वंश परंपरा बनाए रखने के लिए।
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सांकेतिक तस्वीर
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Israel Sperm Extraction News: इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुए युद्ध के बाद एक नई चिकित्सा प्रक्रिया ने लोगों का ध्यान खींचा है। इसका नाम है पोस्ट ह्यूमस स्पर्म रिट्रीवल (पीएसआर)। इसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके स्पर्म निकाले और सुरक्षित रखे जाते हैं। कई परिवार, खासकर उन लोगों के जिन्होंने अपने प्रियजनों को युद्ध में खो दिया, इस प्रक्रिया की मदद से उनकी याद और वंश को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

इजरायल में अब यह प्रक्रिया कानूनी और चिकित्सा तौर पर मान्यता प्राप्त है। स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों के अनुसार, मृत्यु के बाद जितनी जल्दी स्पर्म निकाला जाए, उसके जीवित रहने की संभावना उतनी ज्यादा होती है। अगर 24 घंटे के अंदर रिकवरी हो जाए, तो लगभग 75 प्रतिशत मामलों में सफल परिणाम मिलते हैं। 72 घंटे के बाद भी कुछ जीवित कोशिकाएं मिल सकती हैं। इस वजह से युद्ध के समय परिवार बहुत जल्दी निर्णय लेते हैं और अस्पतालों से संपर्क करते हैं।

मौत के बाद जल्द स्पर्म निकालने पर जोर

अश्केलोन अकैडमिक कॉलेज की प्रोफेसर बेला सावित्स्की ने 600 इजरायली पुरुषों पर एक सर्वे किया। उनका मानना है कि अगर सैनिक भर्ती के समय इस प्रक्रिया के लिए पहले से सहमति दे दें, तो जरूरत पड़ने पर परिवारों को परेशानी नहीं होगी। उन्होंने अपना निजी अनुभव साझा किया और बताया कि युद्ध में उनके बेटे की मृत्यु के बाद वे यह प्रक्रिया नहीं करवा सकीं, क्योंकि बहुत देर हो चुकी थी। इस वजह से वे समय पर निर्णय और प्रक्रिया की तैयारी को जरूरी मानती हैं।

युद्ध में बढ़ी आवेदन की संख्या

2023 से 2025 के बीच इजरायल में पीएसआर के लिए 236 आवेदन किए गए, जिनमें से 229 सफल रहे। यानी सफलता की दर 97 प्रतिशत रही, जो बहुत ऊंची मानी जाती है। इनमें से लगभग 77 प्रतिशत आवेदन माता-पिता की ओर से किए गए थे। कई माता-पिता का कहना है कि वे अपने बेटे की वंश परंपरा खत्म नहीं होने देना चाहते। युद्ध के कारण कानूनी नियमों में भी बदलाव हुआ। पहले माता-पिता को अदालत से मंजूरी लेनी पड़ती थी, लेकिन युद्धकाल में यह शर्त अस्थायी रूप से हटा दी गई।

इससे परिवारों को जल्दी से स्पर्म रिकवरी का मौका मिला। कुछ डॉक्टरों ने 37 घंटे बाद भी जीवित स्पर्म निकालने में सफलता पाई। एक अध्ययन में 28 मामलों में से 89 प्रतिशत में स्पर्म जीवित पाए गए। इससे यह साफ है कि नई तकनीक और समय पर निर्णय ने इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना दिया है।

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