मुनीर बनेंगे राष्ट्रपति? शहबाज से मुलाकात के बाद सियासत गरम, पाक में हलचल तेज

Sharif Munir Meetings: पाकिस्तान में नए राष्ट्रपति को लेकर जारी कयासों के बीच सेना प्रमुख की शीर्ष नेताओं से मुलाकातों ने राजनीतिक हलचल को और हवा दे दी है। हालांकि, सरकार और रक्षा मंत्री ने इन...
मुनीर बनेंगे राष्ट्रपति? शहबाज से मुलाकात के बाद सियासत गरम, पाक में हलचल तेज
मुनीर की शहबाज से मुलाकात, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुलाकात ने चर्चाओं को और हवा दी। अफवाहें थीं कि आसिम मुनीर राष्ट्रपति पद पर जरदारी की जगह ले सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सरकार के मंत्री भी इन अटकलों को नकार रहे हैं।

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच मुलाकात हुई। इससे कुछ समय पहले ही सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पीएम आवास पहुंचे थे और शरीफ से उनकी बैठक हुई थी। शाम को होने वाली इन दो अहम बैठकों के चलते राष्ट्रपति पद में बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

जरदारी और शरीफ की बैठक

इस मुद्दे पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक अखबार से बातचीत में बताया कि राष्ट्रपति के इस्तीफे और उनकी जगह सेना प्रमुख के आने की चर्चा जरदारी और शरीफ की बैठक में जरूर हुई थी, लेकिन उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने बताया कि इस तरह की अटकलें एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थीं, जिसे बाद में संभवतः हटा लिया गया था।

सियासी व्यवस्था पर पूरा जताया भरोसा

आसिफ ने तमाम अटकलों को नकारते हुए कहा कि राष्ट्रपति जरदारी को तमाम हालात की पूरी जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने सरकार और मौजूदा सियासी व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताया है। आसिफ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को सामने आ रही अपुष्ट खबरों और घटनाओं के बारे में जानकारी दी है, जिनसे वो भली-भांति वाकिफ हैं।

शरीफ और आसिम मुनीर की हुई मुलाकात

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति से मिलने से पहले प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की बैठक से पहले शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की मुलाकात हुई थी। उनका कहना था कि इसमें कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आमतौर पर सप्ताह में तीन बार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मिलते हैं। आसिफ ने यह भी कहा कि सेना प्रमुख की राजनीति में कोई रुचि नहीं है।

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