Year Ender 2025: इन विदेशी नेताओं ने की भारत की यात्रा, जानिए क्या पड़ा देश की विदेश नीति पर असर
Foreign Leader Visits India in 2025 भारत ने इस साल कई विदेशी नेताओं का स्वागत किया, जिनसे बड़े रक्षा और व्यापार समझौते हुए। इससे भारत की रणनीतिक स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक अवसर मजबूत हुए।
- Written By: अक्षय साहू
2025 में इन विदेशी नेताओं ने की भारत की यात्रा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Year Ender 2025: 2025 में भारत की कूटनीति ने वैश्विक मंच पर खास छाप छोड़ी। इस साल कई बड़े विदेशी नेता भारत आए, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री, कनाडा की विदेश मंत्री एनीटा आनंद और मध्य पूर्व के कई देश शामिल थे। इन दौरों में हुए बड़े रक्षा और व्यापार समझौते ने भारत की रणनीतिक स्थिति, आर्थिक अवसर और वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया।
यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन का भारत दौरा
यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दौरा न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम था। यह दौरा ऐसा समय में हुआ जब भारत और रूस दोनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ का सामना कर रहे हैं। पुतिन ने साल के अंत में 4-5 दिसंबर को भारत का दौरा किया। यह दौरा भारत‑रूस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने के लिए अहम माना गया।
मुख्य समझौते और पहलें:
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- रणनीतिक रक्षा सहयोग: उन्नत रक्षा तकनीक के आदान‑प्रदान और साझा सैन्य अभ्यास।
- नाभिकीय ऊर्जा विस्तार: कुदनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के विस्तार में सहयोग।
- ऊर्जा आपूर्ति: रूस से तेल और गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित।
- मेड इन इंडिया निवेश: औषधि और तकनीक क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन।
भारत को लाभ:
- रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई।
- वैश्विक शक्ति केंद्रों में संतुलन कायम।
- अंदरूनी रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमता बढ़ी।
ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड डील पर बनी सहमती
2025 व्यापार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साल रहा। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने और अमेरिका फर्स्ट की नीति के तहत दुनिया के बाकी देशों पर टैरिफ लगाने के बाद से देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों ने अहम भूमिका निभाई। इसी उथल-पुथल के माहौल के बीच 8-9 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भारत दौरे पर आए। यह दौरा व्यापार और निवेश पर केंद्रित था।
मुख्य समझौते:
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA): निर्यात को बढ़ावा देने और 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ घटाने की योजना।
- तकनीकी और फिनटेक सहयोग: AI, साइबर सुरक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी में साझेदारी।
लाभ:
- निर्यात और विदेशी निवेश में वृद्धि।
- तकनीकी और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को मजबूती।
कनाडा के साथ रिश्तों में सुधार के संकेत
भारत और कनाडा के रिश्ते पिछले कई महीनों से तनावपूर्ण चलते आ रहे थे, लेकिन इस साल अक्टूबर दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ थोड़ी पिघलती नजर आई जब कनाडा की विदेश मंत्री एनीटा आनंद भारत आयीं। उनका मुख्य उद्देश्य राजनयिक रिश्तों और निवेश सहयोग को मजबूत करना था।
मुख्य पहलें:
- व्यापार, ऊर्जा, क्लाइमेट और कृषि क्षेत्रों में साझा कार्य योजना।
- शिक्षा और कौशल विकास के नए अवसर।
लाभ:
- भारत‑कनाडा निवेश और व्यापारिक संबंधों में सुधार।
- शिक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा।
मीडिल ईस्ट के साथ भी भारत के रिश्ते हुए और मजबूत
भारत ने 2025 में सिर्फ पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत नहीं किए, बल्कि मीडिल ईस्ट के देशों के साथ कई अहम समझौते किए। इस साल इजराइल, बहरीन और अन्य मध्य पूर्व देशों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया।
समझौते:
- उन्नत सुरक्षा और साइबर सुरक्षा तकनीक में सहयोग।
- ऊर्जा और तकनीकी निवेश के समझौते।
लाभ:
- आतंरिक सुरक्षा मजबूत।
- मध्य पूर्व के बाज़ारों तक पहुंच बढ़ी।
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2025 में भारत की विदेश नीति पर असर
- मल्टीअलाइनमेंट नीति: भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप और मध्य पूर्व के साथ संतुलित सहयोग बनाए रखा।
- ऊर्जा सुरक्षा: विविध स्रोतों से तेल और गैस आयात सुनिश्चित किया।
- व्यापार और निवेश: FTA और साझेदारी से निर्यात और निवेश में वृद्धि।
- रक्षा उत्पादन: ‘मेक इन इंडिया’ और उन्नत तकनीक से आत्मनिर्भरता बढ़ी।
- लोगों से लोगों का संपर्क: शिक्षा, संस्कृति और रोजगार सहयोग में वृद्धि।
