मिशन कर्मयोगी (फोटो-सोशल मीडिया)
Union Budget 2026 training allocation: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 में देश की प्रशासनिक व्यवस्था को ‘भविष्य के लिए तैयार’ (Future Ready) बनाने पर विशेष बल दिया गया है। सरकार ने सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण, प्रशासनिक सुधारों और भर्ती प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए भारी निवेश का प्रस्ताव किया है। इसका उद्देश्य सरकारी मशीनरी को अधिक पारदर्शी, सक्रिय और तकनीक-सक्षम बनाना है।
सरकार ने अपनी सबसे महत्वाकांक्षी नौकरशाही सुधार पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ (राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम) के लिए 126 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है। मिशन कर्मयोगी का विजन सरकारी कर्मचारियों को केवल नियमों पर चलने वाला ‘बाबूक’ नहीं, बल्कि रचनात्मक, पेशेवर और तकनीक के साथ तालमेल बिठाने वाला सेवक बनाना है।
1. प्रशिक्षण प्रभाग के कुल ₹299 करोड़ के बजट में से 120.8 करोड़ रुपये प्रमुख संस्थानों के स्थापना व्यय के लिए रखे गए हैं। इसमें शामिल हैं:
2. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA): मसूरी स्थित यह संस्थान आईएएस (IAS) अधिकारियों की ट्रेनिंग का मुख्य केंद्र है।
3. सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान (ISTM): दिल्ली स्थित यह संस्थान सचिवालय स्तर के अधिकारियों को नवीनतम नियमों और ‘मिड-करियर’ प्रशिक्षण से अवगत कराता है।
4. यह आवंटन अधिकारियों की घरेलू और विदेशी यात्राओं के खर्च के साथ-साथ केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) के अधिकारियों के पाठ्यक्रम शुल्क को भी कवर करेगा।
प्रशासनिक सुधारों को गति देने के लिए सरकार ने 65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस फंड का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा।
बजट में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कर्मचारी चयन आयोग (SSC) को 525.2 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले संशोधित अनुमान (₹548.5 करोड़) के लगभग करीब है और देश भर में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में मदद करेगा। दूसरी ओर, लोक सेवकों के सेवा संबंधी विवादों को सुलझाने वाले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) को 166.42 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि का एक हिस्सा न्यायाधिकरण की विभिन्न पीठों के लिए भूमि खरीदने और नए भवनों के निर्माण पर खर्च होगा।
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सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रचार-प्रसार के लिए 3.5 करोड़ रुपये का एक विशेष कोष रखा गया है। साथ ही, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) के लिए संयुक्त रूप से 52.07 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। सरकार का यह व्यापक बजट आवंटन स्पष्ट करता है कि वह ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रशासनिक ढांचे की जड़ों को मजबूत कर रही है।