बंगाल चुनाव से ठीक पहले ED का बड़ा एक्शन, I-PAC के को-फाउंडर विनेश चंदेल गिरफ्तार

I-PAC Cofounder Arrested: चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ने बंगाल में तूफान ला दिया है। कोयला घोटाले के तार अब सीधे चुनावी मैनेजमेंट से जुड़ते दिख रहे हैं।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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ED Arrests Vinesh Chandel: सोमवार की रात राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब खबर आई कि चुनावी रणनीति बनाने वाली मशहूर संस्था I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई बंगाल के उस चर्चित कोयला घोटाले से जुड़ी है, जिसने पिछले कुछ समय से राज्य की सियासत को गरमा रखा है।

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ईडी ने दिल्ली से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की है। दरअसल, यह मामला नवंबर 2020 में दर्ज सीबीआई की उस एफआईआर से निकला है, जिसमें आसनसोल के आसपास ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से करोड़ों रुपये के कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था।

क्या कहती हैं जांच एजेंसियां?

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस अवैध खनन से जो काली कमाई हुई, उसका एक बड़ा हिस्सा हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया। चंदेल की गिरफ्तारी उनके दिल्ली स्थित ठिकानों पर छापेमारी के बाद हुई है, जिससे यह साफ है कि जांच की आंच अब उन रणनीतिकारों तक पहुंच गई है जो पर्दे के पीछे रहकर सत्ता की बिसात बिछाते हैं।

हवाला के जरिए करोड़ों के खेल का दावा

जांच एजेंसी ने जो तथ्य सामने रखे हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। ईडी का दावा है कि कोयला तस्करी के इस सिंडिकेट से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने करोड़ों रुपये I-PAC की रजिस्टर्ड कंपनी तक पहुंचाए थे। जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के ऐसे लेनदेन की बात सामने आई है जो मुंबई की एक 'अंगड़िया' फर्म के जरिए किए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि यह वही फर्म है जो दिल्ली के शराब घोटाले में भी एजेंसियों के रडार पर रही थी। केवल विनेश ही नहीं, बल्कि आई-पैक के एक अन्य निदेशक ऋषि राज सिंह और आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के ठिकानों पर भी इसी महीने तलाशी ली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा बंगाल सरकार और ईडी का टकराव

इस मामले ने उस वक्त एक बड़ा मोड़ ले लिया था जब जनवरी में कोलकाता में हुई छापेमारी के दौरान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गई थीं। इस घटना को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा, जहां कोर्ट ने राज्य की एजेंसियों द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप को 'बेहद गंभीर' माना।

अदालत ने साफ तौर पर कहा कि देश में कानून का शासन बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि हर संस्था स्वतंत्र रूप से काम करे और किसी भी अपराधी को राज्य सरकार की सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब भी मांगा है।

अभिषेक बनर्जी ने बताया साजिश

जैसे-जैसे बंगाल में मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे ये गिरफ्तारियां राजनीतिक रंग लेती जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इसे 'लेवल प्लेइंग फील्ड' के खिलाफ बताया है और आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करने के लिए की गई है।, हालांकि, जांच एजेंसियों का अपना तर्क है कि वे केवल सबूतों और मनी ट्रेल का पीछा कर रही हैं।

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