पश्चिम बंगाल में अब 'बांग्ला' ही होगी सरकार की भाषा! 1 सितंबर से बदल जाएंगे सारे नियम, ऐतिहासिक फैसला!

Bengali Made Official: पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी दफ्तरों में 1 सितंबर से बंगाली भाषा में काम करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लिया।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Bengali Language Mandatory In West Bengal Government Offices: पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि 1 सितंबर 2026 से राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों में सारा कामकाज अनिवार्य रूप से बंगाली भाषा में किया जाएगा। सरकार का यह फैसला न केवल फाइलों तक सीमित रहेगा बल्कि आम जनता से जुड़ी हर छोटी-बड़ी सेवा अब राज्य की मातृभाषा में उपलब्ध होगी।

बड़े फैसले का कारण

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बड़े फैसले के पीछे जस्टिस सुशांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया है। आपको बता दें कि इस आयोग का गठन साल 2011 में तत्कालीन TMC सरकार के दौरान किया गया था। मुख्यमंत्री ने अब इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए इसे लागू करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था तभी प्रभावी और जन-केंद्रित हो सकती है, जब वह लोगों की अपनी भाषा में काम करे।

जनता के लिए  महत्वपूर्ण बदलाव

इस नए नियम के लागू होने के बाद, सरकारी कामकाज का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। 1 सितंबर से निम्नलिखित सेवाओं में बंगाली भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य होगा:

  • डिजिटल गवर्नेंस: सभी सरकारी पोर्टल, वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन अब बांग्ला में होंगे
  • नागरिक सेवाएँ: एप्लीकेशन फॉर्म, प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) और एफआईआर (FIR) जैसी बुनियादी सुविधाएँ अब स्थानीय भाषा में मिलेंगी।
  • पब्लिक कम्युनिकेशन: प्रेस रिलीज, पब्लिक साइनबोर्ड, और ट्रेनिंग का सामान भी अब बंगाली में ही तैयार किया जाएगा।
  • सरकारी विभाग: भूमि एवं भूमि सुधार विभाग से लेकर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक का सारा कामकाज अब बांग्ला में ही संचालित होगा।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विजन

हालाँकि, राज्य के भीतर बंगाली को अनिवार्य कर दिया गया है लेकिन केंद्र सरकार के साथ आधिकारिक बातचीत के लिए हिंदी का इस्तेमाल जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक पत्र का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने प्रशासन में बंगाली भाषा के अधिक उपयोग का सुझाव दिया था।

यह फैसला भारत के महान विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर लिया गया है। डॉ. मुखर्जी हमेशा से इस बात के समर्थक थे कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनका सही स्थान मिलना चाहिए।

अधिकारियों को एक हफ्ते का अल्टीमेटम

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस फैसले को लेकर काफी सख्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रियों और विधायकों को एक हफ्ते के भीतर इस संबंध में पत्र का जवाब देना होगा। इसके साथ ही एक अनुपालन सूची मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने खुद भी एक हफ्ते के भीतर इस पूरे मामले पर अपनी अनुपालन रिपोर्ट देने की बात कही है।

इस फैसले से साफ है कि बंगाल सरकार अब अपनी जड़ों और भाषा की ओर लौट रही है जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते समय भाषा की बाधा का सामना न करना पड़े।

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