स्लीपर कोच में बच्चों का हंगामा : यात्री हुए परेशान, लोगों ने कहा- पेरेंट्स की लापरवाही का नतीजा

Viral Train Post स्लीपर कोच में महिला यात्री को बच्चों की शरारतों के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पोस्ट वायरल होने के बाद ट्रेन में पेरेंट्स की जिम्मेदारी पर बहस शुरू हो गई है।
A passenger’s journey in a sleeper coach turned frustrating due to unruly children, sparking debate on parental responsibility in trains.
वायरल पोस्ट का स्क्रीनशॉट।
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Train Child Misbehaviour : ट्रेन के स्लीपर कोच को अक्सर सबसे व्यवहारिक और घुल-मिलकर सफर करने वाली बोगी माना जाता है। यहां 3AC, 2AC या 1AC के मुकाबले यात्रियों के बीच बातचीत ज्यादा होती है। लेकिन कई बार यही माहौल परेशानियों का कारण भी बन जाता है, खासकर तब जब छोटे बच्चे हद से ज्यादा शरारतें करने लगते हैं और उनके माता-पिता उन्हें रोकने में नाकाम रहते हैं।

ऐसा ही एक मामला हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर वायरल हो गया, जिसमें एक महिला यात्री ने अपना खराब ट्रेन अनुभव साझा किया।यात्री के अनुसार, वह स्लीपर कोच में साइड लोअर बर्थ पर बैठी थी। कुछ देर बाद एक स्टेशन पर बच्चों का एक समूह उनकी मां के साथ डिब्बे में चढ़ा।

बच्चों की शरारतों से यात्री परेशान

महिला का दावा है कि मां बच्चों को संभालने में बिल्कुल सक्षम नहीं दिख रही थीं और बच्चे तुरंत ही पूरे कोच में शोर-शराबा, चढ़ना-उतरना और दौड़भाग करने लगे। इस बीच ऊपर की अपर बर्थ पर बच्चों ने ‘तांडव’ मचा रखा था, जिससे नीचे बैठे यात्रियों का सफर मुश्किल हो गया था।

महिला ने बताया कि उसने अपना हाथ अपर बर्थ की सीढ़ियों पर रखा हुआ था, तभी अचानक एक बच्चा उसी हाथ पर पैर रखकर ऊपर चढ़ गया। कुछ ही सेकंड बाद एक और बच्चा उसका सामान धकेलते हुए ऊपर चढ़ने लगा, जिससे उसका फोन खिड़की से बाहर गिरते-गिरते बचा। उसने लिखा, “मुझे समझ नहीं आ रहा था कि बच्चों को डांटूं या मां से कहूं, लेकिन वह खुद ही सब संभालने में असमर्थ दिख रही थी।”

यूजर्स ने कहा- माता-पिता को बच्चों को सीख देना जरूरी

इस पोस्ट पर Reddit यूजर्स ने रिएक्शन दिए। कई लोगों ने लिखा कि स्लीपर कोच में अक्सर ऐसी स्थिति देखने को मिलती है, जहां बच्चों को पब्लिक स्पेस का बिल्कुल भी अनुशासन नहीं सिखाया जाता। कई यूजर्स ने कहा कि माता-पिता को बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि उनकी हरकतों से दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो।

कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि रेलवे को भी ऐसे मामलों में कुछ दिशानिर्देश या घोषणा करनी चाहिए ताकि कोच में अनुशासन बना रहे। यह घटना इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि ट्रेन यात्रा सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी का अनुभव भी है। पब्लिक स्पेस में बच्चों को अनुशासन सिखाना माता-पिता का बुनियादी दायित्व है, जिसकी अनदेखी दूसरों के सफर को खराब कर सकती है।

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