उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करेगी पीड़िता, हाई कोर्ट से की ये अपील
Kuldeep Singh Sengar: पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील महमूद प्राचा ने कहा कि पीड़िता आगे सबूत रिकॉर्ड करने और स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी जन्मतिथि समेत और डॉक्यूमेंट पेश करने की मांग करती है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
कुलदीप सेंगर, फोटो- सोशल मीडिया
Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अतिरिक्त सबूत पेश करने की अनुमति मांगी है। इसी मामले में सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पीड़िता की अर्जी पर जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि अपील की सुनवाई अब अंतिम चरण में है।
25 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने बताया कि पीड़िता स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार जन्मतिथि सहित अन्य दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने और आगे सबूत दर्ज कराने की अनुमति चाहती है। कोर्ट ने पाया कि अर्जी के साथ कोई दस्तावेज संलग्न नहीं है, इसलिए पीड़िता को 31 जनवरी तक जरूरी दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट ने कुलदीप सेंगर और सीबीआई दोनों को दो हफ्ते के भीतर इस अर्जी पर जवाब दाखिल करने को कहा। सेंगर की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन पेश हुए।
सम्बंधित ख़बरें
राहुल गांधी आय से अधिक संपत्ति मामले में आज हाई कोर्ट में खुलेगी ‘सीलबंद’ फाइल, दोपहर बाद शुरू होगी सुनवाई
एआई, ड्रोन और क्वांटम तकनीक से यूपी बनेगा देश का डीप टेक कैपिटल, CM Yogi ने लिखी योगी की पाती
Stanford India Conference 2026: SIR पर जवाब देना जरूरी…बंगाल चुनाव पर शशि थरूर ने सरकार पर उठाए सवाल
भारत में कैसे पहुंचा ‘मेड इन पाकिस्तान’ पंखा? कुशीनगर के मदरसे में हुआ खुलासा, इलाके में मचा हड़कंप
जमानत और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की सजा निलंबित कर उसे जमानत दी थी। हालांकि, 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। पीड़िता ने सेंगर की 2020 में दाखिल अपील में अतिरिक्त सबूत पेश करने के लिए यह नई अर्जी दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि और उम्रकैद के आदेश को चुनौती दी गई है।
POCSO पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
सजा निलंबित करते समय हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया सेंगर के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 5(c) के तहत अपराध नहीं बनता और यह मामला गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सेंगर को पब्लिक सर्वेंट की श्रेणी में रखकर POCSO की धारा 5(c) या IPC की धारा 376(2)(b) लागू नहीं की जा सकती।
CBI कोर्ट पहले ही ठहरा चुकी है दोषी
2019 में स्पेशल CBI कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को उन्नाव में एक नाबालिग से रेप का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, वह 2020 में पीड़िता के पिता की गैर-इरादतन हत्या के एक अलग मामले में 10 साल की सजा भी काट रहा है।
यह भी पढ़ें- प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही थी मायावती, अचानक हॉल में आग लगने से मच गई अफरातफरी, देखें वीडियो
पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर और उसके साथियों पर लंबे समय तक परेशान करने और धमकाने के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने पीड़िता के परिवार पर हुए हमलों समेत जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की थी।
