हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जमानत पर चल रहे आरोपी को विदेश यात्रा से नहीं रोका जा सकता; NOC से इनकार का आदेश रद्द
Allahabad High Court:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मुकदमा लंबित होने के कारण जमानत पर चल रहे आरोपी को विदेश यात्रा से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने NOC देने से इनकार करने का आदेश रद्द कर दिया
- Reported By: ओमप्रकाश सिंह परिहार | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
High Court Order Regarding NOC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल इस आधार पर किसी जमानत पर चल रहे व्यक्ति को विदेश यात्रा से नहीं रोका जा सकता कि उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा लंबित है। न्यायालय ने विशेष न्यायाधीश द्वारा विदेश यात्रा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से इनकार करने के आदेश को निरस्त कर दिया।
वर्ष 2021 का आपराधिक मुकदमे से जुड़ा मामला
महाराजगंज के कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी वजीर आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया। मामला वर्ष 2021 में दर्ज आपराधिक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (पूर्व आईपीसी) की धारा 323, 504, 325 और 308 के तहत केस दर्ज है। याची इस मामले में जमानत पर है और रोजगार के उद्देश्य से विदेश जाना चाहता है।
मेनका गांधी बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक फैसले का हवाला
याची की ओर से अदालत को बताया गया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है तथा उसके ऊपर दो नाबालिग बच्चों और वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी है। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि मुकदमे की पैरवी उसके परिवार के सह-आरोपी सदस्य करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर वह अदालत में उपस्थित होगा।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एनओसी देने से इनकार करने के लिए कोई ठोस कारण दर्ज नहीं किया और 25 अगस्त 1993 की केंद्र सरकार की अधिसूचना पर भी विचार नहीं किया।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि याची किसी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है तथा जिस अपराध का आरोप है, उसकी अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। ऐसे में उसे विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालत का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि यदि याची 10 दिनों के भीतर नया आवेदन प्रस्तुत करता है, तो उस पर 15 दिनों के भीतर विधि के अनुसार निर्णय लिया जाए।
