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नागपुर महल दंगा: संदिग्धों पर मनपा की बुलडोजर कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, मांगा 10 वर्षों का रिकॉर्ड

Nagpur High Court: महल दंगा मामले में बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने मनपा को फटकार लगाते हुए 10 वर्षों का रिकॉर्ड तलब किया और छुट्टी के दिन की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Jul 11, 2026 | 03:26 PM

नागपुर हाई कोर्ट, महल दंगा, बुलडोजर कार्रवाई,(सोर्स: सोशल मीडिया)

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Nagpur High Court Mahal Riot Case: नागपुर महल में हुए दंगे के कथित आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए भले ही मनपा ने कुछ संदिग्धों की सम्पत्तियों पर बुलडोजर चला दिया हो लेकिन इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में दायर याचिका पर अब महानगरपालिका की किरकिरी हो रही है।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महल जोनल कार्यालय के सहायक आयुक्त द्वारा इस तरह की आनन-फानन में की गई कार्रवाई को लेकर न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने 10 वर्षों का रिकॉर्ड मांगा है।

मनपा को कड़ी फटकार लगाते हुए हाई कोर्ट ने अवकाश के दिन केवल कुछ ही घंटों में नोटिस और नोटिस के बाद की गई तोड़ कार्रवाई पर न केवल आश्चर्य जताया बल्कि कथित अवैध निर्माण को गिराने की मनपा की जल्दबाजी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। अश्विन इंगोले और मनपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमजी भांगडे ने पैरवी की।

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कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन

कोर्ट ने मात्र 24 घंटे का नोटिस देकर छुट्टी के दिन कार्रवाई करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे ‘प्राकृतिक न्याय’ और ‘कानून की उचित प्रक्रिया’ का खुला उल्लंघन करार दिया है। सहायक आयुक्त ने महाराष्ट्र झोपड़पट्टी सुधारना, निर्मूलन व पुनर्वसन अधिनियम 1971 के तहत महल दंगे के कथित आरोपी के खिलाफ नोटिस जारी किया था जिसमें कहा गया था कि 1 जनवरी 2000 के बाद के झोपड़पट्टी निर्माण को कोई संरक्षण प्राप्त नहीं है।

नोटिस में लगभग 149.60 वर्गमीटर के पक्के आवासीय निर्माण को अवैध और बिना अनुमति के किया गया बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार मनपा के अधिकारियों ने 22 मार्च 2025 की सुबह 11।05 बजे उनके घर पर यह ‘कारण बताओ’ नोटिस चस्पा किया। इसके ठीक 24 घंटे के भीतर अगली ही सुबह प्रशासन ने मकान पर तोड़फोड़ (डिमोलेशन) की कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस कमिश्नर के पत्र पर हुई ‘टारगेटेड’ कार्रवाई?

सुनवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अदालत ने कहा कि यह त्वरित कार्रवाई पुलिस कमिश्नर द्वारा 21 मार्च 2025 को लिखे गए एक पत्र के आधार पर की गई थी जिसमें एक ‘दंगई /उपद्रवी की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शहर में ऐसे सैकड़ों मामले लंबित हैं तो विशेष रूप से इसी याचिकाकर्ता को इतनी जल्दी में ‘टारगेट’ क्यों किया गया?

याचिकाकर्ता की दलील : ‘हमारे पास 2002 का स्वीकृत नक्शा है’

याचिकाकर्ता ने नागपुर मनपा के दावों को खारिज करते हुए अदालत को बताया कि उनका निर्माण (ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और सेकंड फ्लोर) 2002 के एक वैध ‘सैक्शन प्लान’ (स्वीकृत नक्शे) के अनुसार किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस में दर्शाया गया 149.60 वर्गमीटर का क्षेत्रफल गलत है और पड़ोस की जगह का विवाद पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि नियमानुसार 15 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए था लेकिन यहा केवल 24 घंटे का समय दिया गया।

अधिकारी जज और सजा देने वाले नहीं बन सकते

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रशासन के इस रवैये को आड़े हाथों लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना उसकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता, यह संपत्ति के अधिकार और मौलिक अधिकारों का हनन है।

यह भी पढ़ें:-सीताबर्डी महाजन प्लाजा अवैध निर्माण: नागपुर हाई कोर्ट ने मनपा को दिया 6 हफ्ते में कार्रवाई का अल्टीमेटम

कोर्ट ने कहा कि अधिकारी खुद ही ‘जज’ और सजा देने वाले नहीं बन सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि निर्माण वैध है या अवैध बल्कि हम उस तरीके और ‘प्रक्रिया’ पर सवाल उठा रहे हैं जिसके तहत यह तोड़ा गया।

High court seeks 10 year record over mahal riot accused demolition action nagpur

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Published On: Jul 11, 2026 | 03:26 PM

Topics:  

  • High Court
  • Maharashtra News
  • Municipal Corporation
  • Nagpur News

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