UP में ‘हाथ’ ने छोड़ी ‘साइकिल’ की सवारी? कांग्रेस का अकेले दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान; जानें रणनीति
UP की राजनीति में गठबंधन पर एक बड़ी खबर आई है, कांग्रेस ने सपा से अलग होते हुए अकेले दम पर पंचायत चुनाव लड़ने का एलान किया। कांग्रेस की इस रणनीति को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
- Written By: सौरभ शर्मा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ी खबर (फोटो- सोशल मीडिया)
Congress to fight alone in UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर हुई एक हाई लेवल मीटिंग के बाद कांग्रेस ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने ऐलान कर दिया है कि वह यूपी में आगामी पंचायत चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ नहीं, बल्कि अकेले अपने दम पर लड़ेगी। इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की एक नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
बिहार चुनाव के नतीजों और यूपी उपचुनाव में मिली सीटों को लेकर हुई खींचतान के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल ली है। यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने स्पष्ट किया है कि आगामी पंचायत चुनाव में पार्टी का कोई गठबंधन नहीं होगा। इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी सभी 11 एमएलसी सीटों पर अकेले लड़ने की बात कह चुके हैं। दरअसल, कांग्रेस को लगता है कि गठबंधन में रहकर उसे वो सम्मानजनक सीटें नहीं मिल पा रही हैं जिसकी वह हकदार है। इसलिए पार्टी अब जमीनी स्तर पर अपनी खुद की ताकत को परखना और बढ़ाना चाहती है।
विधानसभा सीटों की सौदेबाजी का प्लान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी बार्गेनिंग पावर बढ़ाने के लिए है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस के पिछले प्रदर्शन को देखते हुए उसे 50 से 60 सीटें ही देना चाहती है, जबकि कांग्रेस की नजर 125 से 150 सीटों पर है। अपनी मांग को मनवाने के लिए कांग्रेस को पंचायत और एमएलसी चुनाव में दम दिखाना होगा। पार्टी ने ‘संगठन सृजन अभियान’ शुरू किया है, जिसके तहत जो कार्यकर्ता पंचायत चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और सदस्य बनाएंगे, उनके लिए भविष्य में विधानसभा टिकट के रास्ते भी खुलेंगे।
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तीन कैटेगरी में बंटी सीटें
कांग्रेस ने अपनी तैयारी को पुख्ता करने के लिए प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को तीन कैटेगरी ए, बी और सी में बांट दिया है। ए कैटेगरी में वे 200 सीटें हैं जहां पार्टी का परंपरागत वोट बैंक मजबूत रहा है। कांग्रेस का पूरा फोकस इन्हीं सीटों पर है। पार्टी का मानना है कि प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों में शिक्षित वोटर अब भी कांग्रेस की तरफ देख रहा है। एमएलसी और पंचायत चुनाव अकेले लड़कर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह समाजवादी पार्टी के सामने नतमस्तक नहीं है और गठबंधन में उसे बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए।
