यूपी में राजभर की ‘पीली सेना’ तैयार, 2500 युवाओं को बांटी वर्दी और डंडा, सियासी गलियारों में मची हलचल
SBSP Training Camp: यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में अपनी 'राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना' का विस्तार करते हुए 2500 से अधिक युवाओं को पीली वर्दी और पीला डंडा बांटकर नई सियासी बहस छेड़ दी।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
यूपी में राजभर की 'पीली सेना' की ट्रेनिंग, फोटो- सोशल मीडिया
OP Rajbhar Sena: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक बयानों और ‘पीले अंदाज’ के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आजमगढ़ के अतरौलिया में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ढाई हजार से अधिक युवाओं को पीली वर्दी और डंडा सौंपकर अपनी ‘पीली सेना’ को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया।
आजमगढ़ के अतरौलिया स्थित खजुरी गांव में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सुभासपा द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का दृश्य किसी सैन्य छावनी जैसा नजर आ रहा था, जहां चारों तरफ पीला रंग हावी था। इस कार्यक्रम के माध्यम से ओम प्रकाश राजभर ने अपनी ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ का विस्तार किया और ढाई हजार से ज्यादा युवाओं को न केवल संगठन से जोड़ा, बल्कि उन्हें एक विशिष्ट ड्रेस कोड- पीली वर्दी और पीला डंडा देकर भविष्य के लिए तैयार रहने का मंत्र दिया।
‘शक्ति और अनुशासन’ का प्रतीक है पीला डंडा: राजभर
कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने पीली वर्दी के साथ डंडा बांटने पर सवाल उठाया, तो कैबिनेट मंत्री ने इसे स्पष्ट करते हुए ‘शक्ति और अनुशासन’ का प्रतीक बताया। राजभर ने तर्क दिया कि जिसे लोग डंडा कह रहे हैं, वह कोई अवैध हथियार नहीं है, बल्कि यह केवल प्रशिक्षण का एक हिस्सा मात्र है। उन्होंने कहा कि इसका उपयोग युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए किया जाएगा। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, “हमारे पूर्वज भी लाठी-डंडा रखते थे, यह हमारी परंपरा और आत्मरक्षा का प्रतीक है। इसे गलत नजरिए से देखना अनुचित है।”
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पूर्वांचल की सियासत और ‘पीली सेना’ का गणित
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजभर इस ‘पीली सेना’ के जरिए पूर्वांचल में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करना चाहते हैं। प्रशिक्षण शिविर के बहाने हजारों युवाओं को एक खास ड्रेस कोड और डंडा सौंपना, संगठन की एकजुटता और आक्रामकता को प्रदर्शित करने का एक तरीका माना जा रहा है। राजभर ने मंच से हुंकार भरते हुए स्पष्ट किया कि यह सेना किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीब, वंचित और शोषित वर्ग की आवाज बनने के लिए तैयार की जा रही है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों और महाराजा सुहेलदेव के विचारों का प्रचार-प्रसार करें।
ओम प्रकाश राजभर पता नहीं अपनी कौन सी सेना तैयार कर रहे हैं, और पता नहीं कैसे युद्ध की तैयारी कर रहे हैं ? या फिर अपने समाज के युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं pic.twitter.com/jimt0vns4i — Satyendra Yadav (@SatyendraY14494) January 19, 2026
प्रशिक्षण शिविर में जिस तरह से खुलेआम डंडे बांटे गए, उसने विपक्ष को सरकार और राजभर पर हमलावर होने का मौका दे दिया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या एक जिम्मेदार कैबिनेट पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह डंडे बांटकर शांति व्यवस्था को चुनौती नहीं दे रहा? हालांकि, राजभर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।
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उनके अनुसार, यह पूरी तरह से एक ‘संगठनात्मक गतिविधि’ है जिसका उद्देश्य युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें समाज में एक अनुशासित नागरिक के रूप में स्थापित करना है। आने वाले समय में यह ओम प्रकाश राजभर ‘पीला डंडा’ यूपी की राजनीति में कितनी गर्मी पैदा करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
