पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (सौ. सोशल मीडिया)
Samajwadi Party Bhubaneswar Speech: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित ‘विजन इंडिया’ कार्यक्रम में ईवीएम (EVM) और भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चुनावी जीत के बावजूद तकनीक के बजाय बैलेट पेपर का समर्थन करते हैं और भाजपा पर पौराणिक विरासत को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रति अपना विरोध एक बार फिर मुखरता से दर्ज कराया है। भुवनेश्वर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटें भी जीत जाती है, तब भी वे ईवीएम को कभी पसंद नहीं करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को विकसित भारत की अवधारणा से जोड़ते हुए वैश्विक उदाहरण पेश किए।
अखिलेश यादव ने तर्क दिया कि जर्मनी जैसे विकसित देश में ईवीएम से मतदान कराना असंवैधानिक माना जाता है। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदाताओं के पास चॉइस (विकल्प) होती है और जिस जापान ने ईवीएम का आविष्कार किया, वहां भी इसका उपयोग मतदान के लिए नहीं किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय मतदाताओं की जागरूकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ लोगों को अभी भी हाथ धोकर खाना खाने और बीमारी में इलाज के लिए जाने जैसी बुनियादी बातें सिखानी पड़ रही हैं, वहां ऐसी तकनीक का प्रयोग सवाल खड़े करता है।
अखिलेश यादव ने भाजपा की धार्मिक राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के शासनकाल में देश में जितने मंदिर तोड़े गए हैं, उतने इतिहास के किसी भी राजा के कार्यकाल में नहीं तोड़े गए। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल पौराणिक और प्राचीन मंदिरों को निशाना बना रहा है, लेकिन मीडिया का एक बड़ा वर्ग सरकार का साथ दे रहा है और इन मुद्दों को नहीं दिखा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने काशी की मौलिक पहचान को संकट में डाल दिया है। उनके अनुसार, “अब न क्यूटो बना और न काशी रह गयी।” उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि वे सैफई और इटावा में एक मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन वहां भी भाजपा के लोग किसी न किसी तरह से बाधाएं (टंगड़ी) उत्पन्न कर रहे हैं।
चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अखिलेश यादव ने कानूनी लड़ाई का भी संकेत दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट की सत्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) और वोटर लिस्ट के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। यादव ने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार के दौरान अन्याय और अत्याचार अपने चरम पर पहुँच गया है और अब समय आ गया है कि सभी विपक्षी ताकतें एकजुट होकर भाजपा को सत्ता से बेदखल करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि यदि भाजपा को बैलेट पेपर के माध्यम से चुनौती दी जाए, तो उन्हें बड़े पैमाने पर हराया जा सकता है।
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अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने देश की वर्तमान प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और जन-जागरूकता के स्तर पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें अभी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ऐसे में ईवीएम जैसी जटिल तकनीक के माध्यम से मतदान की पारदर्शिता पर संदेह स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक बनाना है। अखिलेश ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके तर्क गलत हैं, तो भाजपा खुलकर इसका सामना करे।