बरेली में बेटे के साथ ओमप्रकाश। इमेज-सोशल मीडिया
Om Prakash Returns Home: उत्तर प्रदेश के बरेली के शाही इलाके में करीब 25 साल पहले घर छोड़कर गए ओम प्रकाश दिल्ली में गुम हो गए। वहां ओमप्रकाश को सलीम की पहचान मिल गई। वहीं, मुस्लिम धर्म अपनाकर निकाह भी कर लिया। उनके चार बच्चे हो गए। अब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू हुआ तो दिल्ली में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल सका, तब उन्होंने अपने गांव का रुख किया।
अपने पैतृक गांव पहुंचते ही उनका फूल-मालाओं और बैंड-बाजे के साथ स्वागत किया गया। परिवार ने उनका शुद्धिकरण कराया, जिसके बाद उन्होंने फिर से हिंदू धर्म अपना लिया है। शाही थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव निवासी ओम प्रकाश 15 साल की उम्र में अपने घर से नाराज होकर चले गए थे। कई साल बाद भी वह नहीं लौटे तो परिजनों और गांव वालों ने उनको मृत मान लिया था।
25 वर्ष बाद शुक्रवार को यान 28 नवंबर को वह बड़ी बहन चंद्रकली के साथ गांव पहुंचे तो उन्हें देख कर हर कोई हैरान हो गया। गांव वालों ने ओमप्रकाश और उनके साथ आए उनके 15 वर्षीय बेटे जुम्मन का फूल-मालाओं और बैंड-बाजे से स्वागत किया। ओमप्रकाश के आने पर उनके छोटे भाई रोशन लाल, भतीजे कुंवर सेन, वीरपाल समेत प्रधान वीरेंद्र राजपूत, रामवीर और अन्य ग्रामीणों ने बेहद खुशी जताई। ओमप्रकाश ने बताया कि अब वह अपने परिवार के साथ इसी गांव में ही रहना चाहते हैं। वह गांव के पते पर ही अपनी आईडी भी बनवाएंगे।
बरेली : 40 साल बाद SIR में पोल खुली, घर लौटा ओमप्रकाश 15 साल की उम्र में घर छोड़कर दिल्ली गया ओमप्रकाश वहां मुस्लिम बनकर सलीम नाम से रहने लगा और शाहबानो से निकाह कर लिया।
SIR में खुलासे के बाद वह 40 साल बाद अपने काशीपुर गांव लौटा और फिर से हिंदू धर्म अपना लिया। भव्य स्वागत किया। pic.twitter.com/k8mx1G9qZ2 — Asif Ansari (@Asifansari9410) November 29, 2025
कैसे बीते 25 साल?
ओमप्रकाश ने बताया कि वह घर से नाराज होकर गए थे तो कुछ दिनों तक बरेली में ही मजदूरी की थी। उसके बाद वह दिल्ली चले गए। दिल्ली में किराये का कमरा लेने के लिए आईडी की काफी अधि अड़चन आई तो वहां के लोगों ने उनका नाम सलीम, पुत्र ताहिर हुसैन रख दिया। उन्होंने उस्मानपुर दिल्ली का पता दर्ज कराते हुए वोटर कार्ड बनवा दिया। मोहल्ले के मंगल की बेटी शाहरबानो से उनका निकाह भी करा दिया गया। अब उनकी चार बेटिया-रुखसाना, रुखसार, रूपा, कुप्पा और 15 वर्षीय बेटा जुम्मन है। वह तीन बेटियों का निकाह कर चुके हैं। वहां पर एसआईआर के फॉर्म को पूरा करने के लिए ताहिर की कोई आईडी नहीं मिलने पर वह गांव आने पर मजबूर हुए।