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खत्म हो जाएगा अंसारी परिवार का सियासी वजूद! योगी के चक्रव्यूह से निकल पाना नामुमकिन, अब्बास के बाद उमर की राह भी मुश्किल
- Written By: अभिषेक सिंह
अब्बास अंसारी को हेट स्पीच के मामले में दो साल की सजा मिलते ही उनकी विधायकी छिन गई है। इसी के साथ माना जा रहा है कि मऊ में अंसारी परिवार का सियासी वजूद भी ख़तरे में आ गया है।

कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
मऊ: उत्तर प्रदेश की मऊ सदर सीट से विधायक रहे अब्बास अंसारी की विधायक सदस्यता खत्म हो गई है। अधिकारियों को धमकाने के आरोप में एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब्बास अंसारी को 2 साल जेल की सजा सुनाई थी। अब सजा मिलने के बाद अब्बास अंसारी की विधायक सदस्यता भी खत्म हो गई है। अब्बास माफिया और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। यानी अब मऊ सदर सीट पर विधानसभा उपचुनाव होगा।
1996 से ही अंसारी परिवार का मऊ विधानसभा सीट पर कब्जा है। मुख्तार अंसारी ने 1996 में पहली बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर मऊ सदर से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह लगातार चार बार विधायक चुने गए। इसमें दो बार निर्दलीय और एक बार अपनी पार्टी कौमी एकता दल के टिकट पर विधायक चुने गए। फिर 2017 में बसपा के टिकट पर विधायक बने।
1986 में मुख्तार पर दर्ज हुआ पहला केस
मुख्तार अंसारी के खिलाफ पहली बार 1986 में केस दर्ज हुआ था। मुख्तार अंसारी का खौफ सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ता चला गया। उत्तर प्रदेश के बाहर भी उसका खौफ था। मुख्तार अंसारी के पास कई शूटर थे जो वारदातों को अंजाम देते थे। बाद में मुख्तार को लगने लगा कि अब उसे राजनीति में भी कदम रखना होगा, ताकि उसे संरक्षण मिलता रहे।
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कैसे शुरू हुआ मुख्तार का सियासी सफर
इसी क्रम में मुख्तार अंसारी ने 1996 में पहली बार बसपा से टिकट लिया और मऊ सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में मुख्तार अंसारी ने जीत हासिल की और यहीं से उसका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। इसके बाद मुख्तार अंसारी कभी चुनाव नहीं हारे। 2002 के चुनाव में मुख्तार ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
मुख्तार ने 2007 का विधानसभा चुनाव भी निर्दलीय ही जीता था। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल से चुनाव लड़ा और जीता, जबकि 2017 में वह बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीता। 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और तब से मुख्तार अंसारी और उसके परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए।
2022 में अब्बास अंसारी को सौंपी विरासत
जब मुख्तार जेल चला गया तो उसने 2022 में अपनी विरासत अपने बेटे अब्बास अंसारी को सौंप दी। अब्बास अंसारी ने ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और मऊ सदर सीट से जीत हासिल की। हालांकि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अब्बास ने अधिकारियों को धमकाया था, जिसे लेकर मऊ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। अब इस मामले में फैसला आ गया है।
अब जब अब्बास अंसारी की विधायकी समाप्त हो गई है और मुख्तार का निधन हो गया है तो बड़ा सवाल यह उठता है कि मुख्तार सियासी विरासत कौन संभालेगा? इसके जवाब में इस मामले में बरी हुए अब्बास के छोटे भाई उमर का नाम सामने है। माना जा रहा है कि अगर मऊ सदर सीट पर उपचुनाव होता है तो उमर अंसारी समाजवादी पार्टी से टिकट लेकर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन उनके लिए हालात इतने आसान नहीं होंगे।
योगी सरकार ने लिया माफिया पर एक्शन
योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद मुख्तार के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हुई। 2017 के बाद एक के बाद एक मुख्तार के खिलाफ दर्ज मुकदमों की कोर्ट में पैरवी होने लगी। साथ ही मुख्तार की अवैध संपत्ति पर भी बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई। मुख्तार अंसारी 2019 तक बांदा जेल में बंद रहा।
जब उसे उत्तर प्रदेश में दिक्कत होने लगी तो उसने अपनी सुरक्षा को खतरा बताते हुए यूपी से बाहर जेल ट्रांसफर की अर्जी लगाई। बाद में उसे पंजाब जेल ट्रांसफर कर दिया गया लेकिन योगी सरकार उसे वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। वह यूपी की जेल में नहीं आना चाहता था और उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
मुख्तार अंसारी गैंग के गुर्गों पर चला चाबुक
सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने जीत हासिल की और मुख्तार को पंजाब से बांदा जेल लाया गया। मुख्तार के खिलाफ कुल 65 मुकदमे दर्ज किए गए और उसके 250 से ज्यादा साथियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। मुख्तार अंसारी के कई शूटर भी यूपी पुलिस ने ढेर कर दिए।
सरकार की कार्रवाई के चलते मुख्तार अंसारी और उसके करीबियों की 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति भी जब्त की गई है। मुख्तार के पूरे परिवार पर कई मामले दर्ज हैं। मुख्तार के एक भाई शिबगतुल्लाह अंसारी पर तीन केस दर्ज हैं, तो वहीं, बड़े भाई अफजाल पर 7 मामले दर्ज हैं। हालांकि अफजाल गाजीपुर से सपा सांसद हैं।
बांदा जेल में मुख्तार अंसारी ने तोड़ा दम
मार्च 2024 में मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में मौत हो गई थी। मुख्तार के परिवार का आरोप है कि उसे जेल में धीमा जहर दिया जा रहा था और मुख्तार ने इस बात की शिकायत भी परिवार से की थी। परिवार का दावा है कि मुख्तार का पोस्टमार्टम ठीक से नहीं किया गया।
मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशा अंसारी पर भी आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। वहीं अब्बास अंसारी की पत्नी निखत पर भी आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं अब्बास अंसारी की पत्नी निखत पर भी केस दर्ज है। वहीं मुख्तार के दूसरे बेटे उमर पर भी कई मामले चल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अंसारी परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चक्रव्यूह से बाहर निकल पाएगा?
योगी के चक्रव्यूह से निकलेगा अंसारी परिवार?
माना जा रहा है कि अगर मऊ सीट पर चुनाव होते हैं तो अंसारी परिवार उमर अंसारी को चुनाव लड़वा सकता है। उमर अंसारी अभी जेल से बाहर है। हालांकि उसके खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं। अगर किसी मामले में फैसला आता है तो उमर अंसारी की मुश्किलें भी बढ़ेंगी और परिवार का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। यानी योगी के चक्रव्यूह से निकल पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन सा लग रहा है।
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