RSS चीफ भागवत का बड़ा बयान: जैसे-जैसे हम एक होंगे, उनके टुकड़े होते जाएंगे; पूरी दुनिया में हार रहे हैं वो

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे सनातन धर्म के सब लोग एक होएंगे वैसे-वैसे ये टूटते जाएंगे। आगे कहा आप देख लीजिए पिछले 50 सालों में हिंदू एक होता गया तो इनके टुकड़े होते चले गए।
RSS chief Bhagwat's big statement: As we unite, they will be divided into pieces
RSS चीफ मोहन भागवत (फोटो- सोशल मीडिया)
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RSS Chief Mohan Bhagwat: वृंदावन के सुदामा कुटी आश्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बहुत बड़ा और गंभीर बयान दिया है। उन्होंने बिना किसी का स्पष्ट नाम लिए कहा कि जैसे-जैसे सनातन धर्म के लोग एकजुट हो रहे हैं, विरोधियों के टुकड़े होते जा रहे हैं। भागवत ने जोर देकर कहा कि पिछले 50 सालों में हिंदू समाज की एकता ने विरोधियों को कमजोर कर दिया है और अब वे अंदर से पूरी तरह खोखले हो चुके हैं।

संघ प्रमुख ने कहा कि हमारे विरोधी पूरी दुनिया में हार रहे हैं और वो हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। हालांकि, उन्होंने समाज को सावधान करते हुए यह भी कहा कि हमें जिस तरह तैयार होना चाहिए था, अभी हम वैसे तैयार नहीं हुए हैं। शायद इसीलिए विरोधी हमारे सामने नाच रहे हैं। उनका यह अंदाज और बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे उन्होंने आश्रम के शताब्दी महोत्सव में साझा किया।

500 साल का संघर्ष और हमारी जीत

भागवत ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि मुगलों ने हमारे ऊपर 500 साल तक राज किया। अगर हमारा बुरा होना होता तो उसी समय हो गया होता, लेकिन हम उन मुश्किल हालात से भी बाहर निकल आए। उन्होंने कहा कि तमाम अत्याचारों के बीच भी हमने अपने धर्म को बचाकर रखा और अब हिंदुओं का देश फिर से आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह सब हमारी भक्ति की शक्ति का ही परिणाम है। इस दौरान उन्होंने सुदामा दास जी महाराज के जीवन और नाभा पीठ का परिचय देने वाली एक पुस्तक का विमोचन भी किया।

भक्ति से ही जागेगी असली शक्ति

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आगे समझाया कि समाज की विषमताओं को दूर करने वाली विराट सत्ता भक्ति के बल पर ही मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से हमारी 'बैटरी चार्ज' होती है और शक्ति जागरण का काम हमें ही करना है, क्योंकि शक्ति ही शांति का आधार है। भारत वर्ष में तमाम विपदाओं के बाद भी जीवन चलने का कारण यही भक्ति परंपरा है। इससे पहले, आश्रम के 100 साल पूरे होने पर महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज की अगुवाई में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के अलग-अलग चौराहों से गुजरी और वापस आश्रम पहुंची।

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