
अयोध्या के अस्पताल में बेड़ियों में जकड़ा मरीज, फोटो- सोशल मीडिया
Ayodhya District Hospital Case: अयोध्या के जिला अस्पताल से आया यह शर्मनाक नजारा सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक शख्स अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़ा हुआ है। उसके हाथ-पांव बंधे हुए थे और उसे किसी अपराधी की तरह रखा गया था। वीडियो में उसके सामने भोजन की थाली भी रखी हुई दिख रही थी।
यह अमानवीय कृत्य सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन आनंद-फानन में हरकत में आया और मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया। दुखद यह रहा कि यह कदम उठाने में इतनी देर हो चुकी थी कि शख्स की जान चली गई। सूत्रों का कहना है कि अगर अस्पताल में मरीज का सही समय पर अच्छे से इलाज किया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। यह घटना सरकारी तंत्र पर भी सवालिया निशान खड़ा करती है, जो एक मरीज के साथ मानवीय व्यवहार तक सुनिश्चित नहीं कर सका। बताया जा रहा है कि मरीज को जिस वार्ड में हाथ-पैर बांधकर रखा गया था, वह वार्ड ऑपरेशनल ही नहीं था यानी पहले से बंद चल रहा था। अस्पताल प्रशासन ने यह स्वीकार किया कि मरीज को तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया था।
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद, जिला अस्पताल प्रशासन ने मामले पर लीपा-पोती करते हुए सफाई देने की कोशिश की। जिला अस्पताल के सीएमएस (Chief Medical Superintendent) राजेश कुमार सिंह ने आजतक को बताया कि मरीज को किसी अज्ञात व्यक्ति ने गेट पर छोड़ दिया था। उन्होंने दावा किया कि मरीज की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसे ‘एल्कोहॉलिक साइको’ बताया गया, जिसका अर्थ है कि ज्यादा शराब पीने की वजह से उसकी मानसिक हालत बिगड़ गई थी। सीएमएस ने यह भी बताया कि वह कपड़े फाड़ रहा था और इधर-उधर घूमता था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज को 5 नवंबर को भर्ती किया गया था और 8 नवंबर की सुबह दर्शन नगर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन का यह दावा मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों और मरीज के रिश्तेदारों के बयान से ठीक उलट साबित हुआ है। दर्शन नगर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड के इंचार्ज डॉ. विनोद कुमार आर्य ने बताया कि मरीज को जिला अस्पताल से 8 नवंबर को सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर मेडिकल कॉलेज लाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज को बेहोशी की हालत में लाया गया था। सबसे अहम बात, डॉ. आर्य ने कहा कि वह पागल नहीं था। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज को बताया था कि मरीज क्रॉनिक एल्कोहॉलिक (शराब के नशे का आदी) था और साथ ही उसे शुगर की बीमारी भी थी।
मरीज के भतीजे राहुल ने भी इस बात को दोहराया कि उसके चाचा पागल नहीं थे और उन्हें शुगर की बीमारी थी। राहुल ने बताया कि जब वे उन्हें डिस्चार्ज करवाकर लखनऊ ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौत से ठीक पहले तक उनके चाचा बात कर रहे थे और सब कुछ समझ रहे थे।
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इस शर्मनाक घटना और मरीज की मौत को लेकर सियासी दलों ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ने मरीज की मौत पर दुख जताया है। सपा ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में “शोषण के नए कीर्तिमान” रचे जा रहे हैं। वहीं, यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने इस बांधने के कृत्य को “अमानवीय कृत्य” बताया और कहा कि यह भाजपा सरकार के “घोर पाप का प्रमाण” है। दोनों विपक्षी दलों ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।






