

Highlights:
दो महीने में निस्तारित हों सभी आपत्तियां- हाईकोर्ट
प्रदेश सरकार को जिलावार लंबित आपत्तियों का ब्योरा देने का निर्देश
4234 शिक्षकों को फिलहाल राहत
Allahabad High Order On Court UP Teacher Adjustment: उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी आपत्तियों का दो महीने के भीतर निस्तारण करने की अपेक्षा जताई है। न्यायालय ने सरकार को जिलावार प्राप्त, निस्तारित और लंबित आपत्तियों की अद्यतन स्थिति बताते हुए नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, पिछले पांच वर्षों में अन्य शिक्षकों के विद्यालयों में जुड़ने के कारण सरप्लस घोषित किए गए 4234 शिक्षकों को सभी आपत्तियों के निस्तारण तक परेशान नहीं करने को कहा है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान समायोजन प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिक्षकों की आपत्तियों पर उचित विचार करने पर जोर दिया। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को भी अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया गया है।
राज्य सरकार की ओर से पेश मुख्य स्थायी अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि प्रदेश के 75 जिलों में से 68 जिलों में समायोजन के आदेश जारी किए जा चुके हैं। शेष सात जिलों में अगले दस दिनों के भीतर आदेश जारी करने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार, समायोजन की प्रक्रिया विद्यालयों में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखकर की जा रही है।
सरकार ने यह भी बताया कि फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत जिलों में शिक्षकों की ओर से दाखिल आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया है। इन आपत्तियों पर पारित आदेशों को संबंधित वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों के दौरान विद्यालयों में अन्य शिक्षकों के जुड़ने के कारण 4234 शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया गया है।
न्यायालय ने फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत के उन शिक्षकों को राहत दी है, जो अपनी आपत्तियों के निस्तारण से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे शिक्षक 27 अक्टूबर 2026 तक न्यायालय में उचित प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकते हैं। उन्हें इसकी अग्रिम प्रति मुख्य स्थायी अधिवक्ता को भी उपलब्ध करानी होगी।
इसके बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। न्यायालय के निर्देश के अनुसार, जवाब तीन नवंबर 2026 तक दाखिल किए जाने हैं। प्राप्त आपत्तियों और उनके जवाबों को जिलावार तथा ब्लॉकवार सारणीबद्ध कर अदालत के सामने पेश किया जाएगा, ताकि निर्धारित तिथियों पर क्रमवार सुनवाई की जा सके।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत के जो सरप्लस शिक्षक निर्धारित समय सीमा यानी 27 अक्टूबर तक सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल नहीं करेंगे, उनके समायोजन की अनुमति अगली सुनवाई पर दी जा सकती है। इससे प्रभावित शिक्षकों के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन करना महत्वपूर्ण हो गया है।
वहीं, 4234 शिक्षकों के संबंध में अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी आपत्तियों का पहली बार पूर्ण निस्तारण होने तक उन्हें परेशान नहीं किया जाए। राज्य सरकार को जिलावार आपत्तियों की वास्तविक स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। न्यायालय के निर्देशों से समायोजन प्रक्रिया में प्रभावित शिक्षकों की आपत्तियों पर सुनवाई और उनके निस्तारण की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।