

Highlights:
शिक्षक-स्नातक MLC चुनाव बना भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल
2027 के सेमीफाइनल से जोड़कर देखा
बुद्धिजीवी मतदाता जंगलराज और गुंडाराज को वोट नहीं देंगे-एसपी सिंह बघेल
विजय शिवहरे ने पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल
Agra Teacher Graduate MLC Election 2026: शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी इस चुनाव को केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक ताकत परखने के अवसर के रूप में भी देख रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने इसे भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ा चुनाव बताया, वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री एवं आगरा-फिरोजाबाद क्षेत्र के एमएलसी विजय शिवहरे ने इसे 2027 का सेमीफाइनल करार दिया। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने भी विपक्ष के चुनावी आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा की जीत का भरोसा जताया।
प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव हो या विधानसभा और लोकसभा का चुनाव, भाजपा के लिए हर चुनाव प्रतिष्ठा का विषय होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनिंदा मतदाता मतदान करते हैं। यह बुद्धिजीवियों का चुनाव है और भाजपा भारी मतों से जीत हासिल करने जा रही है।
सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के विपक्ष के आरोपों पर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि भाजपा सरकारी मशीनरी का उपयोग केवल इतना कर रही है कि चुनाव आयोग चुनाव को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना ही प्राथमिकता है।
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आकाश अग्रवाल को लेकर पूछे गए सवाल पर बघेल ने कहा कि यदि आकाश अग्रवाल किसी दूसरी पार्टी या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते तो उन्हें अधिक मत मिल सकते थे। उन्होंने सपा के 2012 से 2017 के शासनकाल को निशाने पर लेते हुए अपहरण, डकैती, चेन स्नेचिंग, जमीनों पर कब्जे और पुलिस भर्ती में कथित घोटालों का मुद्दा उठाया।
बघेल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पास पूर्ण बहुमत की सरकार थी और वह अपने शासनकाल की कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों से बच नहीं सकते। उन्होंने सपा के पूर्ववर्ती शासनकालों से तुलना करते हुए अखिलेश सरकार को उससे भी बदतर बताया। बघेल ने कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाता जागरूक हैं तथा वे कथित जंगलराज और गुंडाराज के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे।
उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री और आगरा-फिरोजाबाद क्षेत्र के एमएलसी विजय शिवहरे ने चुनाव को भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता, एमएलसी, विधायक, सांसद, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि जुटे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा यह चुनाव शत-प्रतिशत जीतेगी।
शिवहरे ने कहा कि पार्टी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ रही है। उनके अनुसार, यह मुकाबला 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल की तरह है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा सेमीफाइनल भी जीतेगी और विधानसभा चुनाव के फाइनल में भी विजय हासिल करेगी।
उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने चुनाव में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाता है, तो इससे उसकी हताशा झलकती है।
खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव से पहले ही वोट चोरी और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) जैसे मुद्दों को उठाकर चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने इसे विपक्ष की संभावित हार की आशंका से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह के आरोपों के जरिए विपक्ष अपनी शर्मनाक हार से बचने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा विधायक ने सवाल उठाया कि यदि पार्टी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही होती, तो उसके विधायक, संगठन के पदाधिकारी, केंद्रीय राज्य मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि मतदाताओं के घर-घर जाकर समर्थन की अपील क्यों करते? उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ रहे हैं।
शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों में दो बातें प्रमुखता से सामने आई हैं। पहली, पार्टी इस चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त होने का संदेश दे रही है। दूसरी, चुनाव प्रचार में समाजवादी पार्टी के शासनकाल, कानून-व्यवस्था, वोट चोरी और एसआईआर जैसे मुद्दों को उठाकर आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बहस को भी धार दी जा रही है।
फिलहाल, भाजपा के लिए यह मुकाबला केवल एमएलसी की सीट जीतने का नहीं, बल्कि 2027 से पहले अपनी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत का संदेश देने का भी अवसर बन गया है।