24 साल का इंतजार खत्म…धनंजय सिंह पर हमले के मामले में अभय सिंह बरी, टकसाल शूटआउट पर कोर्ट का बड़ा फैसला
Taksal Cinema Shootout: वाराणसी कोर्ट ने 24 साल पुराने टकसाल सिनेमा शूटआउट में विधायक अभय सिंह को बरी कर दिया है। 2002 में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफिले पर AK-47 से फायरिंग हुई थी।
- Written By: सजल रघुवंशी
अभय सिंह और धनंजय सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Dhananjay Singh Firing Case 2002: वाराणसी की एमपी एमएलए विशेष अदालत ने 15 अप्रैल 2026 को 24 साल पुराने चर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी विधायक अभय सिंह समेत तीन लोगों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। 4 अक्टूबर 2002 को नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास धनंजय सिंह के काफिले पर एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग हुई थी, जिसमें खुद धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर सहित कुल पांच लोग घायल हुए थे।
लंबे समय तक चली सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने पाया कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं, जिसके चलते आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।
जब एके-47 से बरसी थीं गोलियां
यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की शाम करीब 6 बजे की है, जब धनंजय सिंह अस्पताल से जौनपुर लौट रहे थे। वाराणसी के नदेसर इलाके में टकसाल सिनेमा के पास पहले से घात लगाए हमलावरों ने उनके काफिले पर स्वचालित हथियारों से हमला कर दिया। इस फायरिंग में धनंजय सिंह के बाएं हाथ में गोली लगी, जबकि उनके सुरक्षाकर्मी वासुदेव पांडेय और ड्राइवर दिनेश गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय इस हमले को राजनीतिक रंजिश और बाहुबली नेताओं के बीच गैंगवार के रूप में देखा गया था।
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कोर्ट में लंबी बहस
इस मामले में अभय सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था, जिन पर आईपीसी की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत केस दर्ज हुआ। अभियोजन, बचाव और वादी पक्ष के बीच लंबी बहस चली। 13 अप्रैल 2026 को अदालत ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें और दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था। धनंजय सिंह के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी ने आरोपियों के लिए उम्रकैद की मांग की, लेकिन बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की कमजोरी को प्रमुख आधार बनाया। अदालत ने इन्हीं कमियों को देखते हुए फैसला आरोपियों के पक्ष में दिया।
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पहले भी मिल चुकी थी राहत
इससे पहले इसी मामले में एमएलसी विनीत सिंह समेत चार अन्य आरोपियों को भी साक्ष्यों के अभाव में बरी किया जा चुका था। अब मुख्य आरोपी समेत शेष तीन लोगों को भी राहत मिलने के बाद यह मामला लगभग समाप्ति की ओर पहुंच गया है। 24 साल बाद आए इस फैसले ने सभी कानूनी कयासों पर विराम लगा दिया है। हालांकि, वादी पक्ष के पास उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प अभी भी खुला हुआ है, जिससे यह मामला आगे भी कानूनी बहस का विषय बन सकता है।
