अखिलेश के PDA पर मंडराया ‘माया’ का साया! बसपा ने अपनाई पुरानी रणनीति…तो बढ़ गई सपा की टेंशन
UP Politics: बसपा सुप्रीमो की इस बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मायावती अपनी पुरानी रणनीति पर उतर आई हैं और उनके इस अंदाज के चलते समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव का पीडीए भी खतरे में है।
- Written By: अभिषेक सिंह
अखिलेश यादव व मायावती (डिजाइन फोटो)
Uttar Pradesh Politics: बसपा सुप्रीमो और मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में, रविवार को राजधानी लखनऊ में हुई बसपा की बैठक में मायावती ने संगठन के पुनर्गठन की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही, प्रदेश भर से बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बूथ से लेकर जिला स्तर तक की कमेटियों की प्रगति रिपोर्ट मायावती के सामने पेश की।
बसपा सुप्रीमो की इस बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मायावती अपनी पुरानी रणनीति पर उतर आई हैं और उनके इसी पुराने अंदाज़ के चलते समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव का पीडीए भी खतरे में है। क्योंकि अखिलेश के पीडीए में दलित और अल्पसंख्यक भी मायावती के कोर वोटर रहे हैं। हालांकि, पिछले चुनावों में मायावती का वोट बैंक काफी गिरा है।
9 अक्टूबर को होगी BSP की बड़ी रैली
लखनऊ में हुई बसपा की बैठक में ऐलान किया गया है कि 9 अक्टूबर 2025 को कांशीराम की पुण्यतिथि पर एक बड़ी रैली होगी, जिसमें पुराने नेताओं की वापसी और नई रणनीति का ऐलान हो सकता है। बसपा प्रमुख के आदेश के बाद, सभी कार्यकर्ता मिशन 2027 के तहत गांव-गांव जाकर दलित समुदायों, खासकर जाटव वोट बैंक को मज़बूत करने में लगे हुए हैं।
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आम चुनाव में दिखा PDA का कमाल
2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा के कमज़ोर प्रदर्शन के बाद, पार्टी को उबरने के लिए जमीनी स्तर पर उतरना होगा। क्योंकि अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की पीडीए रणनीति ने 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में 37 सीटें जीती थीं, जिसका मुख्य कारण MY (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले का विस्तार करके दलित वोटों को अपनी ओर आकर्षित करना था।
क्यों बढ़ गई है अखिलेश की टेंशन
हालांकि, अब मायावती के सक्रिय होने से अखिलेश यादव के पीडीए पर असर पड़ सकता है। क्योंकि सपा के पीडीए का एक बड़ा हिस्सा दलित वोटों पर टिका है, जो मायावती की बसपा का कोर वोट बैंक रहा है। अगर मायावती की पुरानी रणनीति काम करती है, तो सपा के पीडीए के 20-25% वोट प्रभावित हो सकते हैं।
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अगर 2024 के लोकसभा चुनाव और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मायावती की बसपा के प्रदर्शन पर नज़र डालें, तो यह बेहद खराब रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जहां बसपा यूपी में एक भी सीट नहीं जीत पाई, वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन अपने इतिहास का सबसे खराब रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 403 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को सिर्फ 1 सीट पर जीत मिली।
