पहले हमार लिखो, 3 बार फेल की कहानी से बृजभूषण ने छात्रों को दिया पास का मंत्र
Brijbhushan Singh: बृजभूषण शरण सिंह ने एक कार्यक्रम में छात्रों को प्रेरित करते हुए अपने बचपन को याद किया। उन्होंने अपनी 8वीं तीन बार फेल होने वाली स्टोरी से बच्चों को कड़ी मेहनत की शिक्षा दी।
- Written By: सौरभ शर्मा
पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (फोटो- सोशल मीडिया)
Brij Bhushan Sharan Singh: उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा के बालपुर में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में छात्रों को अपने बचपन की कहानी सुनाकर प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि वे 8वीं कक्षा में तीन बार फेल हुए थे और कैसे फिर नकल करके पास हुए थे, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें कड़ी मेहनत और आत्मनिरीक्षण का महत्व सिखाया। समारोह में हजारों छात्र, उनके अभिभावक और स्थानीय लोग मौजूद थे।
नेता जी ने अपने नकल की कहानी से आत्मग्लानी की बात करते हुए छात्रों को उस वक्त का वाक्या बताया किस तरह से नकल का दुष्परिणाम देखने को मिला और उन्हें इसके पश्चात फिर गलत महसूस हुआ था। बच्चों को आत्मचिंतन का पाठ पढ़ाते हुए जीवन को युद्ध की भांति जीने की बात कही।
नकल की कहानी, आत्मग्लानि का सबक
बृजभूषण शरण सिंह ने मजाकिया लहजे में बताया, “मैं लगातार दो साल आठवीं कक्षा में फेल हुआ। मैं इस तरह फेल हुआ कि नीचे से ऊपर आ गया। मैं सिर्फ खेलकूद में पास हुआ। बाद में नकल करके पास हुआ, लेकिन उस रात मुझे अपराधबोध हुआ और मैं सो नहीं पाया।”
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उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बगल में बैठे एक सहपाठी को नकल करने के लिए धमकाया था। खासकर अंग्रेजी के पेपर में, जब उसे कुछ समझ नहीं आया, तो उसने अपने सहपाठी से कहा, “तिवारी, पहले मेरा पेपर लिख दे, वरना मैं बाहर हाथ-पैर तोड़ दूंगा।” इस तरह वह नकल करके पास हुए थे, लेकिन इस अनुभव से उन्हें अपनी कमियों को समझने और कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी।
आठवीं में दो बार फेल हुआ तब तीसरी बार नकल करके पास हुआ। – बृजभूषण शरण सिंह pic.twitter.com/idIDuzh6O4 — अजयेंद्र राजन शुक्ल / Ajayendra Rajan Shukla 🇮🇳 (@AjayendraRS) July 31, 2025
छात्रों के लिए प्रेरणादायक संदेश
बृजभूषण ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “बच्चों, खुद से बात किया करो, अपनी कमजोरियों को पहचानो और उन पर काम करने लग जाओ। कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता मिलती है। मैंने भी खुद से सवाल किया और तय किया कि अब मैं अपने काम पर ध्यान केंद्रित करूंगा।” उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि जीवन एक युद्ध है, जिसमें अपनी खूबियों और कमजोरियों को समझना बहुत जरूरी है।
बचपन की शरारतें और खेल
बृजभूषण ने अपने बचपन के शरारती दिनों को भी याद किया और बताया कि वे खेलकूद में बहुत अच्छे थे। उन्होंने हंसते हुए कहा, “जब तक मैं दस-पांच छात्रों को हरा नहीं देता, तब तक नाश्ता नहीं करता था।” उनके हल्के-फुल्के अंदाज ने समारोह में मौजूद लोगों को खूब हंसाया।
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इस समारोह का आयोजन गोंडा के बालपुर में आयोजित किया गया था, जहां मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाना था। बृजभूषण अपने संबोधन में कड़ी मेहनत और आत्मनिरीक्षण को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया। उनके खुले और प्रेरक भाषण ने छात्रों और अभिभावकों के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया।
