
नितिन नबीन, फोटो- सोशल मीडिया
BJP Organizational Protocol Update: भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक ढांचे में हालिया बदलावों ने पार्टी के भीतर एक नई कार्यशैली और कड़े अनुशासन का संदेश किया है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर पद की गरिमा बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में गुटबाजी और जातिगत राजनीति करने वालों को कड़ा आईना दिखाया गया है।
भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मनोनयन के बाद पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में व्यक्ति से ऊपर पद होता है। चूंकि नबीन उम्र और अनुभव में कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए अक्सर आपसी चर्चाओं में वरिष्ठ नेता उन्हें नाम से संबोधित कर देते थे। इसे देखते हुए पार्टी ने सभी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि बातचीत के दौरान ‘प्रोटोकॉल’ का पूरा ध्यान रखा जाए।
निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि पुराने निजी संबंध चाहे जो भी रहे हों, लेकिन आधिकारिक चर्चा के दौरान पद की गरिमा के अनुरूप ही सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नितिन नबीन के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। हालांकि, स्वयं नबीन की सादगी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि वे आज भी अपने वरिष्ठों से उसी पुराने सम्मान और सहजता के साथ मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कमान संभालते ही अनुशासनहीनता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में एक खास जाति से जुड़े विधायकों की अलग बैठक और खेमेबाजी की खबरों पर अध्यक्ष ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां पार्टी के संविधान और आदर्शों के खिलाफ हैं। सियासी गलियारों में इस सख्ती को ‘मिशन-2027‘ के लिए टिकट पक्का करने की होड़ पर लगाम कसने के तौर पर देखा जा रहा है।
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लोगों की मानें तो इस कड़े रुख से उन लोगों के पसीने छूट रहे हैं जो अब तक गुट बनाकर और जातिगत राजनीति के सहारे अपनी जड़ें जमाए हुए थे। ऐसे नेताओं को डर है कि यदि उनकी पिछली ‘कारगुजारियां’ नए अध्यक्ष तक पहुंच गईं, तो उनके राजनीतिक भविष्य पर संकट आ सकता है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग इस अनुशासन की सराहना कर रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि आगामी चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाना बेहद जरूरी था। वर्तमान में, भाजपा मुख्यालय से लेकर जिलों तक में इस ‘नए अनुशासन’ और प्रोटोकॉल की चर्चा जोरों पर है।






