अयोध्या में रामलला का तिलक करने आए सूर्यदेव…कुछ इस तरह मना श्रीराम जन्मोत्सव, देखें दिव्य VIDEO
Ram Navami 2026: अयोध्या में रामलला का भव्य सूर्य तिलक! दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में सूर्य की किरणों ने चूमा प्रभु का मस्तक। 56 भोग और 18 घंटे दर्शन, रामनवमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब।
अयोध्या में रामलला का तिलक करने आए सूर्यदेव (Image- Social Media)
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Ram Lalla Surya Tilak: अयोध्या में शुक्रवार को रामनवमी के अवसर पर रामलला का सूर्य तिलक हुआ। यह तिलक प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला का दूसरा सूर्य तिलक था। तिलक का आयोजन दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में किया गया, जब भगवान के ललाट पर नीली किरणें पड़ीं।
सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हुआ। इस महत्वपूर्ण अवसर पर 14 पुजारी गर्भगृह में मौजूद थे और विशेष पूजा की गई। इसके बाद आरती हुई और सूर्य तिलक के बाद कुछ समय के लिए रामलला के पट बंद कर दिए जाएंगे।
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श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या से श्री राम नवमी महोत्सव का सीधा प्रसारणLive webcast of Shri Ram Navami celebrations from Shri Ram Janmabhoomi Mandir, Ayodhya https://t.co/uQDaYjNdS3
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) March 27, 2026
विशेष पूजा और भोग
सूर्य तिलक के बाद रामलला को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग अर्पित किया जाएगा। इस विशेष पूजा के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया था, जिसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक तक पहुंचाई गईं।
आरती और दर्शन
सुबह 5:30 बजे रामलला की आरती की गई, और भगवान को पीतांबर पहनाया गया। इस विशेष दिन पर भक्तों को आम दिनों के मुकाबले 3 घंटे अधिक दर्शन करने का मौका मिलेगा। श्रद्धालु सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक, यानी कुल 18 घंटे रामलला के दर्शन कर पाएंगे। पहले दर्शन का समय सुबह 6:30 से रात 9:30 तक था। राम जन्मभूमि परिसर में लगभग 10 लाख लोग रामलला के दर्शन करने के लिए पहुंचे हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर भारी भीड़ देखी जा रही है, और लंबी-लंबी लाइनें लग चुकी हैं।
वैज्ञानिकों की मेहनत और राम-त्व का अनोखा संगम
बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने सूर्य की गति का गहराई से अध्ययन कर यह विशेष उपकरण तैयार किया है। ट्रस्ट के अनुसार, इसकी डिजाइन इस तरह बनाई गई है कि आने वाले करीब 19 वर्षों तक सूर्य की स्थिति में होने वाले बदलावों के बावजूद इसमें किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दोपहर 12 बजे जैसे ही सूर्य की किरणें मंदिर के ऊपरी हिस्से से टकराईं, वे परावर्तित होकर सीधे रामलला के ललाट पर तिलक के रूप में दिखाई दीं। यह दृश्य बेहद अद्भुत और श्रद्धा से भरा था।
इस खास पल को कैद करने के लिए मंदिर परिसर में 6 विशेष कैमरे लगाए गए थे। साथ ही, दूरदर्शन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इसका सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसे लाखों लोगों ने देखा।