वोट मिलते ही भाजपा…पीएम मोदी की अपील पर भड़के अखिलेश यादव, बोले- चुनाव खत्म होते ही याद आया संकट
Oil and Gold Crisis India: पीएम मोदी की तेल कम उपयोग करने और सोने न खरीदने की अपील पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला। बोले चुनाव खत्म होते ही संकट याद आया, भाजपा की नियत में खोट है।
- Written By: अमन मौर्या
अखिलेश यादव और नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Akhilesh Yadav Slams PM Modi Appeal: पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कम तेल इस्तेमाल करने, वर्क फ्रॉम होम, कम विदेशी यात्राएं और सोने की कम खरीदारी के लिए लोगों से अपील की। प्रधानमंत्री के इस अपील पर देशभर से विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। इस बीच समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का भी बयान सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील पर तंज कसते हुए कहा, चुनाव खत्म होते ही पीएम को संकट याद आ गया। साथ ही उन्होंने भाजपा को संकट का दूसरा नाम दिया।
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो पांच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील भाजपाइयों से हो
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए, क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक पता कर लीजिए या अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी तक।
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पाबंदियां चुनाव बाद ही क्यों याद आईं?
वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या?
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’ इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का… pic.twitter.com/2f8utdxbLR — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 11, 2026
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाजार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफरातफरी फैलाना नहीं।
अपनी नाकामी स्वीकार करे बीजेपी
प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हुए अखिलेश ने कहा, अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत गुट निरपेक्षता की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ खास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका खामियाजा देश की जनता को महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
किसान-मजदूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
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चुनावी राजनीति हुई प्रदूषित
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफरत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है। अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है। साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है।
इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है। उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी। देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा
