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UP Politics: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजधानी लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात करने पहुंचे।हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि दोनों के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि माघ मेला 2026 के दौरान जनवरी में प्रयागराज में प्रशासन और पुलिस के साथ शंकराचार्य के विवाद के बाद कई राजनीतिक नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की यह मुलाकात भी राजनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव के शंकराचार्य से मिलने के बाद इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति और गर्म हो सकती है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से लखनऊ में मुलाकात की। इस दौरान अखिलेश यादव ने दरवाजे पर मौजूद संतों को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। उनके साथ पूर्व सांसद अनु टंडन भी मौजूद रहीं।
बताया जा रहा है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 7 मार्च को वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू की थी। यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर और सीतापुर से होते हुए चार दिन में 10 मार्च को लखनऊ पहुंची। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने बुधवार को गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद किया था। फिलहाल शंकराचार्य कृष्णा नगर इलाके में प्रवास कर रहे हैं, जहां उनसे मिलने के लिए विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां पहुंच रही हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गोरक्षा अभियान के शंखनाद के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए एक बयान दिया था, जिसकी काफी चर्चा हो रही है।
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उन्होंने सभा में कहा, “यह शराब की दुकान नहीं है। यह सभा शुद्ध गाय के दूध की दुकान की तरह है। अगर यहां बहुत ज्यादा भीड़ होती तो इसका मतलब होता कि यह शराब की दुकान है। यहां कम भीड़ है, इससे साफ पता चलता है कि यह शुद्ध गाय के दूध की दुकान है।”