रोहित तिलक ने क्याें छोड़ी कांग्रेस? क्या PM मोदी का सम्मान है बड़ा कारण; लोकमान्य तिलक के वंशज ने बताई वजह

Rohit Tilak Resigns Congress: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के वंशज रोहित तिलक ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। आज उन्होंने इस पर बात करते हुए पार्टी छोड़ने के कारणों को खुलासा किया है।
Rohit Tilak explained the reason for resigning from Congress PM Modi Tilak Award
रोहित तिलक (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Rohit Tilak On Congress: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा देने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के वंशज रोहित तिलक ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। चर्चाएं जोरों पर हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

कांग्रेस को लेकर क्या बोले रोहित तिलक?

इस्तीफे के बाद रोहित तिलक ने पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने खुलासा किया कि तीन साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था, तभी से कांग्रेस नेतृत्व उनसे नाराज चल रहा था। रोहित ने स्पष्ट किया, "यह पुरस्कार तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने देश को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। इससे पहले यह सम्मान इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों को भी दिया जा चुका है।" उन्होंने अफसोस जताया कि पार्टी इसे राजनीतिक चश्मे से देख रही है।

सावरकर के अपमान पर जताई आपत्ति

रोहित तिलक ने वैचारिक मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का वीर सावरकर के प्रति बदला हुआ रवैया उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा, "यह साफ नहीं है कि कांग्रेस अब सावरकर के बारे में इतनी बुराई क्यों कर रही है। पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि वे एक महान मूल्य प्रणाली का प्रतिनिधित्व करते थे।"

तिलक की विरासत और राजनीति

रोहित ने कांग्रेस को इतिहास का आईना दिखाते हुए कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं थे। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कांग्रेस एक पार्टी नहीं बल्कि एक 'आजादी का आंदोलन' थी जिसमें हर विचारधारा के लोग शामिल थे। बाद में, यह अलग-अलग पार्टियों में बंट गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रांतिकारियों का बलिदान देश के लिए था, न कि किसी विशेष दल के लिए।

रोहित तिलक का जाना पुणे और महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय और तिलक समर्थकों के बीच पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।

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