

Allahabad Court On Shankaracharya Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज कथित यौन उत्पीड़न के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में मामले में अगली सुनवाई तक जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली गिरफ्तारी से राहत मिलना, केस दर्ज कराने वाले रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि बटुकों के साथ कथित यौन शौषण के आरोप में शंकराचार्य के खिलाफ निचली अदालत के आदेश पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट से रोक लगने के बाद वाराणसी में मठ में जश्न मनाया गया। शंकराचार्य ने अपने भक्तों और छोटे बच्चों को गुलाल लगाकर इस मौके को उत्सव की तरह मनाया और त्योहार की खुशी में शामिल हुए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती केस में एंटीसिपेटरी बेल पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में बहस हुई। इसमें राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकीलों ने एंटीसिपेटरी बेल का विरोध किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से सीनियर वकीलों ने दलीलें पेश कीं। उनकी तरफ से शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के क्रिमिनल हिस्ट्री की जानकारी दी गई।
इस केस में दर्ज FIR भी कोर्ट में पढ़कर सुनाई गई। एक बच्चे के बारे में कहा गया कि मार्कशीट में वह बालिग है। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता की तरफ से हाई कोर्ट में पेश हुए वकील ने एंटीसिपेटरी बेल का विरोध किया। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एंटीसिपेटरी बेल पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए, अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई। अभी के हालात का मतलब है कि हम अपने ही भाई पर भरोसा नहीं कर सकते। पूरा स्टाफ करप्ट नहीं हो सकता। कोई ऐसा होना चाहिए जिसके दिल में इंसाफ हो। इसलिए, लड़ाई जारी रहनी चाहिए। पूरे देश में हिंदू समुदाय डर गया। वे सोचने लगे कि उनके गुरु ने क्या गलत किया है। केस मनगढ़ंत था। लड़का कभी आश्रम में रहा ही नहीं था।