यूपी में बिहार जैसा कारनामा कर पाएंगे ओवैसी, 2027 में होगा 2022 वाला हाल...या AIMIM करेगी अखिलेश का बुरा हाल?

UP Politics: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का स्ट्राइक रेट पिछले एक साल में शानदार रहा है। जिसके चलते पार्टी के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
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कॉन्सेप्ट फोटो (AI जनरेटेड)
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AIMIM vs Samajwadi Party: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का स्ट्राइक रेट पिछले एक साल में शानदार रहा है। जिसके चलते पार्टी के हौसले सातवें आसमान पर हैं। AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव और हालिया महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर आगे के रास्ते बनाने शुरू कर दिए हैं।

पिछले साल नवंबर में हुए बिहार चुनाव में AIMIM ने पांच विधानसभा सीटें जीतीं। यहां आंकड़ा बिहार की कई क्षेत्रीय पार्टियों से भी बेहतर। इसके बाद हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM ने हाल ही में महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में अपेक्षा से बेहतर नतीजे हासिल किए हैं।

महाराष्ट्र के 125 वार्डों में हासिल की जीत

ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र में 13 नगर निगमों के 125 वॉर्डों में जीत हासिल की है। यह आंकड़ा पिछले नगर निगम चुनावों में जीते गए 56 वॉर्डों की तुलना में कहीं अधिक है। खास बात यह है कि ओवैसी की पार्टी ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी 8 वार्डों में जीत हासिल करने में कामयाब रही है।

उत्तर प्रदेश में कमाल कर पाएगी AIMIM?

पार्टी प्रेसिडेंट ओवैसी एक के बाद एक राज्य में जीत से उत्साहित हैं। पार्टी उत्तर प्रदेश में आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की भी प्लानिंग कर रही है। AIMIM ने इसका ऐलान कर दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बिहार और महाराष्ट्र के बाद क्या ओवैसी की पार्टी उत्तर प्रदेश में कमाल कर पाएगी...?

जूनियर ओवैसी की CM योगी को चुनौती

AIMIM ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को चैलेंज किया। तेलंगाना के निज़ामाबाद में एक रैली में उन्होंने कहा, "मिस्टर योगी, तैयार हो जाइए, मैं UP आ रहा हूं। चलो UP चलते हैं और वहां अपना झंडा गाड़ते हैं।"

शौकत अली ने भी बढ़ाया सियासी तापमान

अकबरुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आते ही यूपी AIMIM अध्यक्ष शौकत अली ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने अपनी पार्टी की लाइन पर कायम रहते हुए एक विवादित बयान जारी किया। शौकत अली ने एक रैली में 'हम दो, हमारे दो दर्जन' का नारा लगाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।

AIMIM UP INFOGRAPHIC
इन्फोग्राफिक (AI जनरेटेड)

मुरादाबाद में एक पब्लिक रैली के दौरान उन्होंने मुसलमानों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की और दावा किया कि इससे देश मजबूत होगा। रैली के दौरान शौकत अली ने दावा किया कि उनके आठ बच्चे हैं और उनके बड़े भाई के 16 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि वह मुसलमानों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए बढ़ावा देंगे।

मुस्लिम-दलित पॉलिटिक्स करती है AIMIM

असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, मुस्लिम और दलित पॉलिटिक्स के लिए काम करती है। तेलंगाना और बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक उनकी पार्टी मुस्लिम-बहुल इलाकों में एक्टिव रूप से चुनाव लड़ती है। इसी वजह से उन्हें बिहार और महाराष्ट्र में सफलता मिली है।

बिहार में पहुंचाया महागठबंधन को नुकसान

AIMIM ने बिहार में बहुत अच्छा परफॉर्म किया। नतीजतन राष्ट्रीय जनता दल की लीडरशिप वाले महागठबंधन को नुकसान हुआ। AIMIM ने बिहार की 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, जहां मुस्लिम आबादी 64% से ज्यादा है। इन 28 सीटों में से पार्टी ने 5 सीटें जीतीं।

यूपी में सपा PDA फार्मूला कर रहा काम

यूपी में मुस्लिम समुदाय तकरीबन एकतरफा सपा को वोट करता है। राज्य विधानसभा में सपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। साल 2024 के आम चुनाव में PDA फार्मूले के तह 37 लोकसभा सीटें जीतीं और भाजपा को पीछे छोड़कर यूपी में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा और सीएम योगी आदित्यनाथ को कड़ी चुनौती देगी।

AIMIM यूपी में बिगाड़ेगी सपा का गेम?

UGC नियमों के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी के साथ रोजगार को लेकर युवाओं का आक्रोश भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ऐसे में आने वाले चुनावों में सत्ता के लिए सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। लेकि अगर AIMIM यूपी में आकर विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारती है तो मुस्लिम वोट बंटने से सपा को नुकसान और भाजपा को फायदा हो सकता है।

2022 में हुआ था AIMIM का बुरा हाल

एक सच यह भी है कि AIMIM ने पिछला 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने 403 विधानसभा सीटों में से 95 पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सभी सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और एक भी उम्मीदवार नहीं जीता। जबकि AIMIM ने बिहार में पिछली बार भी पांच सीटें जीती थीं।

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