EPFO पेंशन बढ़ोतरी पर सरकार का जवाब (सोर्स-सोशल मीडिया)
Hike In EPFO Minimum Pension: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। संसद में हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा हुई लेकिन श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखना वर्तमान समय में सबसे बड़ी और प्राथमिक चुनौती है।
लोकसभा में सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने सरकार से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर सवाल पूछा था। सरकार ने जवाब में कहा कि ईपीएस-95 एक “परिभाषित अंशदान-परिभाषित लाभ” वाली योजना है जिसे वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाना जरूरी है। पेंशन फंड मुख्य रूप से नियोक्ता के 8.33 प्रतिशत और केंद्र सरकार के 1.16 प्रतिशत के योगदान से बनता है जो सीमित है।
पेंशनभोगी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि वर्तमान 1,000 की न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 7,500 किया जाना चाहिए। महंगाई के इस दौर में 1,000 की राशि बेहद कम मानी जा रही है लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाने की कोई नई घोषणा नहीं की है। सरकार का कहना है कि वर्तमान में दी जा रही न्यूनतम पेंशन भी बजट से मिलने वाली अतिरिक्त सहायता के माध्यम से संभव हो पा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के साल 2022 के फैसले के बाद उच्च पेंशन के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने EPFO पोर्टल पर आवेदन किया था। आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी 2025 तक करीब 15.24 लाख आवेदन मिले थे जिनमें से 99 प्रतिशत से ज्यादा का निपटारा हो चुका है। पात्र लोगों को डिमांड लेटर भेजे जा चुके हैं और पैसा जमा करने वालों को पीपीओ जारी करने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
पेंशनभोगियों ने डिमांड लेटर मिलने के बाद पैसे जमा करने के लिए सरकार से कुछ और अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि निर्धारित 3 महीने की अवधि को आगे बढ़ाने का फिलहाल उनके पास कोई प्रस्ताव नहीं है। पेंशनर्स को तय समय के भीतर ही जरूरी रकम जमा करनी होगी ताकि उन्हें उच्च पेंशन का लाभ सुचारू रूप से मिल सके।
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सरकार के अनुसार पेंशन योजना की सफलता और निरंतरता इस बात पर निर्भर करती है कि इसका फंड कितना संतुलित और स्थिर है। पेंशन बढ़ाने से पहले फंड की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखना जरूरी है ताकि भविष्य में कोई बड़ी वित्तीय समस्या न आए। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान मौजूदा संसाधनों का सही प्रबंधन करने और पात्र लाभार्थियों को समय पर भुगतान करने पर केंद्रित है।