8वें वेतन आयोग में DA की गणना का तरीका बदलेगा! कर्मचारियों की सैलरी पर होगा बड़ा असर

8th Pay Commission DA: 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी यूनियनों ने DA के पुराने फॉर्मूले को बदलने और परिवार के आकार को 3 से बढ़ाकर 5 सदस्य करने की मांग की है, जिससे सैलरी में भारी उछाल संभव है।
8th Pay Commission Unions Demand New DA Calculation Formula for Central Government Employees
8वां वेतन आयोग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

8th Pay Commission Salary Structure Change: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन के साथ ही अब महंगाई भत्ते की गणना को लेकर चर्चा काफी तेज हो गई है। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) सहित कई प्रमुख संगठनों ने मौजूदा DA फॉर्मूले को पुराना बताते हुए इसे बदलने की मांग सरकार से की है। यूनियनों का तर्क है कि वर्तमान तरीका आज के समय में बढ़ते हुए खर्चों और महंगाई की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से नहीं दर्शाता है। 8वें वेतन आयोग ने सुझाव देने की आखिरी तारीख को अब बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया है जिससे चर्चा को नया बल मिला है।

मौजूदा DA की स्थिति

महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की कुल सैलरी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसे साल में दो बार संशोधित किया जाता है। जुलाई 2025 से लागू मौजूदा DA की दर 58 प्रतिशत है और जनवरी 2026 में इसके 60 प्रतिशत या उससे अधिक होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि यूनियनों का कहना है कि महंगाई जिस गति से बढ़ रही है उसके सामने मौजूदा फॉर्मूला अब बहुत पुराना पड़ चुका है और अपर्याप्त है।

परिवार के आकार की मांग

कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग यह है कि महंगाई भत्ते की गणना के दौरान परिवार का आधार 3 सदस्यों से बढ़ाकर 5 किया जाना चाहिए। यूनियन चाहती हैं कि इसमें माता-पिता के खर्चों को भी शामिल किया जाए क्योंकि वे भी कर्मचारी की आय पर पूरी तरह से आश्रित होते हैं। इसके अतिरिक्त आज की जरूरतों जैसे इंटरनेट, डिजिटल सेवाएं और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्चों को भी गणना में जोड़ने की मांग की गई है।

आयक्रॉयड फॉर्मूला पर विवाद

वर्तमान में DA की गणना 1957 में अपनाए गए पुराने आयक्रॉयड फॉर्मूला पर आधारित है जो केवल भोजन और आवास जैसी बेसिक जरूरतों को देखता है। यूनियनों का तर्क है कि यह फॉर्मूला सिर्फ जीवित रहने की आवश्यकताओं पर केंद्रित है और आधुनिक जीवन स्तर या शहरी खर्चों को नजरअंदाज करता है। इसलिए इस पुराने नियम को बदलना बहुत जरूरी है ताकि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन उनकी वास्तविक और बढ़ती जरूरतों के मुताबिक तय हो सके।

सैलरी पर संभावित असर

अगर सरकार यूनियनों की इन मांगों को मानकर DA फॉर्मूले में बदलाव करती है तो कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में बड़ा उछाल आ सकता है। न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 30,000 रुपये या उससे भी अधिक हो सकता है जिससे लाखों कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होने से कुल सैलरी में 50 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी खजाने पर दबाव

सैलरी और पेंशन में इस बड़े इजाफे से सरकार के वार्षिक बजट और खर्चों पर एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है। विभिन्न शहरों में रहने का खर्च अलग-अलग होता है इसलिए पूरे देश के लिए एक समान फॉर्मूला बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। अब सबकी नजरें 8वें वेतन आयोग के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं जो यह तय करेगा कि DA गणना का तरीका भविष्य में बदलेगा या नहीं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com