
IMEI से क्या होता है। (सौ. Freepik)
IMEI Mobile Security: स्मार्टफोन आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है ऑनलाइन पेमेंट, सोशल मीडिया, बैंकिंग, फोटो, फाइलें और पर्सनल डेटा सब कुछ इसी छोटे से डिवाइस में सुरक्षित रहता है। लेकिन अगर यही फोन चोरी हो जाए या कहीं गुम हो जाए, तो सबसे भरोसेमंद तरीका IMEI नंबर ही है, जिसके आधार पर फोन की पहचान और ट्रैकिंग संभव होती है। हाल ही में सरकार ने IMEI से जुड़े नियम और अधिक सख्त कर दिए हैं ताकि फेक डिवाइस और फोन चोरी जैसे अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
IMEI यानी International Mobile Equipment Identity, एक 15 अंकों का यूनिक नंबर होता है जो हर मोबाइल फोन को अलग-अलग दिया जाता है। यह फोन का आधार नंबर जैसा है। दुनिया में बना हर स्मार्टफोन, फीचर फोन और ई-सिम आधारित डिवाइस का IMEI अलग होता है। इसे न तो कॉपी किया जा सकता है और न ही बदला जा सकता है, और यही वजह है कि इसे फोन की सबसे सुरक्षित पहचान माना जाता है।
IMEI जानना बेहद आसान है। आप इसे इन तरीकों से देख सकते हैं
फोन चोरी होने की स्थिति में यह नंबर बेहद काम आता है, इसलिए इसे कहीं सुरक्षित लिखकर रखना जरूरी है।
IMEI खुद लोकेशन नहीं बताता, बल्कि यह मोबाइल नेटवर्क के साथ मिलकर फोन की पहचान करता है।
जब भी फोन किसी टावर से कनेक्ट होता है कॉल, मैसेज या इंटरनेट के दौरान नेटवर्क उसका IMEI रिकॉर्ड कर लेता है। इससे फोन की लोकेशन और एक्टिविटी ट्रैक होती रहती है।
भारत सरकार के CEIR सिस्टम में IMEI ब्लॉक करने की सुविधा है। ब्लॉक होने के बाद फोन में नई SIM डालने पर भी वह काम नहीं करेगा।
नेटवर्क कंपनियों से इस IMEI की लोकेशन और उपयोग संबंधी जानकारी लेकर चोरी हुए फोन का पता लगाया जाता है।
नया कानून IMEI से छेड़छाड़ को गैर-जमानती अपराध बनाता है। IMEI बदलने की कोशिश करना अब गंभीर अपराध है।
आज फोन में बैंकिंग ऐप्स, UPI, फोटो, OTP, कॉन्टैक्ट्स और महत्वपूर्ण डेटा सब मौजूद है। ऐसे में फोन चोरी होना सिर्फ एक डिवाइस खोना नहीं, बल्कि पूरी डिजिटल पहचान चोरी हो जाना है। IMEI:
सरकार ने IMEI से छेड़छाड़ को गैर-जमानती अपराध घोषित किया है। अब इसमें 3 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सख्ती इसलिए बढ़ाई गई है क्योंकि
पहले तकनीशियन अवैध सॉफ्टवेयर से IMEI क्लोन करते थे। अब सरकार ने
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