54 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में फंसा रहा रिटायर्ड बैंक मैनेजर, खाते से उड़ गए 40 लाख, ऐसे चलता है नया साइबर जाल

Digital Arrest Scam: मुंबई से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसमें भांडुप इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को साइबर ठगों ने पूरे 54 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
Retired Bank Manager Digital Arrest Scam for 54 Days 40 Lakh Drained
Digital Arrest Scam (Source. Gemini)
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Digital Arrest Scam In Mumbai: मुंबई से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसमें भांडुप इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को साइबर ठगों ने पूरे 54 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और मानसिक कैद में रखते हुए उनके करीब 40 लाख रुपये ठग लिए। इस केस को देखने पर यह तो समझ में आता है कि साइबर ठगों ने अब लोगं के दिमाग के साथ खेलना शुरु कर दिया है।

एक फोन कॉल से शुरू हुआ डर का खेल

जानकारी में बताया गया कि ठगी की शुरुआत एक अनजान नंबर से आए कॉल से हुई थी। कॉल से आ रही दूसरे तरफ की आवाज ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और विश्वास दिलाया की आपका आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गंभीर अपराधों किया जा रहा है। शुरुआती बातचीत तो बिलकुल आम थी लेकिन कुछ ही मिनटों बाद मामला डरावना बनने लगा। वहीं बातचीत को दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर किया गया, वहीं उस दूसरे व्यक्ति ने खुद को मुंबई ATS और NIA का अधिकारी बताया और यहीं से ठगों की असली शुरुआत हुई। पीड़ित को यह बताया गया की उसका नाम दिल्ली बम ब्लास्ट, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग जैसे मामलों में देखने को मिल रहा है।

नकली FIR, वीडियो कॉल और मानसिक दबाव

इस ठगी को सिर्फ बात में ही पूरा नहीं किया गया उन्होंने फर्जी FIR नंबर, नकली सरकारी लेटर और वीडियो कॉल पर यूनिफॉर्म में लोगों को दिखाकर पूरा माहौल असली जैसा दिखाया था। इस मामले में पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल और फोन कॉल पर रखा गया ताकि वह किसी और से बात ना कर सकें और मदद का कोई रास्ता ना मिले। इसके साथ ही उसको यह धमकी भी दी गई की अगर उसने किसी को इस बारें में बताया तो उसे तुरंत गिरफ्तारी कर लिया जाएगा। जिस कारण से पीड़ित डर और मानसिक दबाव में आकर धीरे-धीरे अपनी जिंदगीभर की जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने लगा। इस 54 दिनों तक चलने वाले ठगी में ठगों ने लगभग 40 लाख रुपये तक का धोखा दिया।

आखिर क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

आपको बता दें कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया होती ही नहीं है। यह बस साइबर अपराधियों द्वारा बनाया गया नया तरीका है, जिससे वह लोगों की कमाई को लुटते है और इस ठगी को पूरा करने के लिए वह खुद को पुलिस, CBI, RBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर सामने वाले को डराना शुरु कर देते है।

ठग पीड़ित को कहते है की आपका नाम एक केस में सामने आ रहा है और इसकी जांच करने के लिए आपको डिजिटल तरीके से हिरासत में रखा जाएगा। जिसमें नकली दस्तावेज और फर्जी कोर्ट पेपर दिखाकर लोगों को इस ठगी पर भरोसा भी दिलाया जाता है। ऐसी तरह से पीड़ित को लगातार कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते है।

सरकार और पुलिस ने पहले ही दी थी चेतावनी

इस तरह के मामलों को देखने के बाद सरकार और साइबर एक्सपर्ट कई बार इस बात को साफ कर चुके हैं कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज होती ही नहीं है। यहां तक की कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तारी नहीं कर सकता है और पैसे तो बिलकुल नहीं मांग सकता।

लेकिन इतने बार बताने के बाद भी लोग इस जाल में फंस रहे हैं, क्योंकि साइबर ठगों ने खुद को पहले से ज्यादा टेक्निकल और स्मार्ट बना लिया हैं। जिसमें वह असली जैसी दिखने वाली आईडी कार्ड, नकली ऑफिस और सरकारी माहौल बनाकर लोगों को भ्रमित करते है और इस तरह की ठगी में ज्यादातर बुजुर्ग और रिटायर्ड लोगों को आसान टारगेट बनाया जाता है। ऐसे में ध्यान रखें की आपके पास कभी ऐसा कॉल आए तो डराकर पैसे देने नहीं है और गिरफ्तारी की धमकी दी जाए तो डरना नहीं है, आपको उस कॉल को तुरंत काटना है और स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना है।

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