Artificial Intelligence (Source. Freepik)
India AI Summit 2026: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अब तक सबसे बड़ी बहस पश्चिमी देशों में होती रही है, लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। लंदन, सियोल और पेरिस के बाद अब AI के भविष्य, उसके नियम और नैतिक सीमाओं पर वैश्विक मंथन दिल्ली में होने जा रहा है। India AI Impact Summit सिर्फ एक टेक इवेंट नहीं, बल्कि उस बदलाव का संकेत है जहां AI की ताकत और दिशा पश्चिम से निकलकर ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रही है।
अब तक AI से जुड़ा वैश्विक एजेंडा मुख्य रूप से पश्चिमी राजधानियों में ही तय होता रहा।
लेकिन इन बैठकों में विकासशील देशों, गरीब आबादी और ग्रामीण समाजों की ज़रूरतें अक्सर नजरअंदाज रहीं। अब दिल्ली इस खाली जगह को भरने जा रही है।
India AI Impact Summit के जरिए भारत साफ संदेश दे रहा है कि वह AI का सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि AI के नियम, मॉडल और नैतिक ढांचे तय करने वाला देश बनना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Made in India, Made for the World” विज़न का यह सीधा विस्तार है।
भारत इस समिट में तीन स्तरों पर नेतृत्व दिखाना चाहता है:
आज AI में डेटा पश्चिम के पास है, कंप्यूटिंग ताकत कुछ गिने-चुने देशों के पास और नियम वही बनाते हैं जिनके पास संसाधन हैं। भारत इस समीकरण को चुनौती दे रहा है। भारत का तर्क है कि AI का सबसे बड़ा असर गरीब, ग्रामीण और विकासशील समाजों पर पड़ेगा, इसलिए नियम भी उन्हीं की भागीदारी से बनने चाहिए।
भारत का फोकस सिर्फ सेफ्टी नहीं, बल्कि इम्पैक्ट और इन्क्लूज़न पर है।
आज AI सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, सैन्य क्षमता और सूचना नियंत्रण का सवाल बन चुका है। दिल्ली में यह बहस इसलिए जरूरी है ताकि AI को शक्ति के हथियार की जगह वैश्विक सार्वजनिक भलाई के साधन के रूप में देखा जा सके।
ये भी पढ़े: अब बच्चों का WhatsApp रहेगा कंट्रोल में, पैरेंट्स को मिलेगी सीधी निगरानी
India AI Impact Summit 19-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में होगी। यह ग्लोबल साउथ में होने वाली पहली वैश्विक AI समिट होगी। 100 से ज्यादा देशों के विशेषज्ञ, नेता, नीति निर्माता और 100 से अधिक वैश्विक CEO इसमें शामिल होंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron समेत Google, Nvidia, Qualcomm जैसी बड़ी कंपनियों के दिग्गजों की मौजूदगी भी संभावित है।
अगर AI भविष्य की भाषा है, तो भारत चाहता है कि उसका व्याकरण भी लोकतांत्रिक, समावेशी और वैश्विक हो। यह समिट तय करेगी कि क्या AI के नियम सिर्फ अमीर देश लिखेंगे या ग्लोबल साउथ भी उस टेबल पर बैठेगा जहां भविष्य लिखा जाता है।