Face ID (Source. Freepik)
How Face ID Works: आज के दौर में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग का साधन नहीं, बल्कि हमारी निजी जिंदगी का डिजिटल तिजोरी बन चुका है। ऐसे में सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है। इसी जरूरत को देखते हुए कंपनियों ने फेस अनलॉक तकनीक यानी Face ID पेश की। लेकिन क्या यह सच में सुरक्षित है? क्या कोई इसे बेवकूफ बना सकता है? और क्या यह पासकोड से बेहतर है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Face ID आपके चेहरे की थ्री-डायमेंशनल (3D) मैपिंग पर आधारित होता है। यह सिर्फ फोटो देखकर अनलॉक नहीं होता, बल्कि आपके चेहरे के अलग-अलग पॉइंट्स को स्कैन करता है।
जब आप पहली बार Face ID सेट करते हैं, तो फोन आपके चेहरे का डिजिटल मॉडल तैयार करता है। हर बार अनलॉक करते समय यह सिस्टम उसी डेटा से मिलान करता है। इसमें इंफ्रारेड कैमरा और डॉट प्रोजेक्टर जैसी तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे कम रोशनी में भी आपका फोन आसानी से अनलॉक हो जाता है।
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या फोटो या वीडियो दिखाकर फोन खोला जा सकता है? आमतौर पर नहीं। क्योंकि Face ID सिर्फ 2D इमेज पर भरोसा नहीं करता, बल्कि गहराई (Depth) भी पहचानता है। हालांकि, कुछ दुर्लभ मामलों में एक जैसे जुड़वां (ट्विन) या बहुत एडवांस्ड 3D मास्क से सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन आम उपयोगकर्ता के लिए यह जोखिम बेहद कम माना जाता है।
यह तकनीक खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो तेज और आसान एक्सेस चाहते हैं।
सुरक्षा के मामले में दोनों के अपने फायदे हैं। पासकोड पूरी तरह आपके दिमाग पर निर्भर है, लेकिन अगर कोई आपका कोड देख ले या अंदाजा लगा ले तो खतरा बढ़ सकता है। वहीं Face ID बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है, जिसे दोहराना मुश्किल होता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि लंबा और मजबूत पासकोड सबसे सुरक्षित विकल्प है, लेकिन Face ID सुविधा और सुरक्षा का संतुलित मेल देता है। बेहतर सुरक्षा के लिए आप दोनों का साथ में उपयोग कर सकते हैं।
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अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में आसान और तेज सुरक्षा चाहते हैं, तो Face ID एक भरोसेमंद विकल्प है। लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा के लिए मजबूत पासकोड रखना भी जरूरी है। आखिरकार, आपकी डिजिटल सुरक्षा आपकी जागरूकता पर निर्भर करती है।