मोबाइल पर आया अलर्ट तो घबराएं नहीं, सरकार का नया सिस्टम, मुसीबत के समय करेगा मदद
Mobile Alert System: नए मोबाइल-आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का ट्रायल भारत में होने वाला है। जिसको लेकर सरकार ने कुछ अहम बातें लोगों तक पुहुंचाई है। जो उनको पता होना जरूरी है।
- Written By: सिमरन सिंह
Mobile Alert System (Source. Freepik)
Mobile Alert System By Government of India: भारत सरकार इन दिनों में एक नए मोबाइल-आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का ट्रायल कर रही है। जिसको करने से इस दौरान कई लोगों के मोबाइल फोन पर टेस्ट मैसेज आ सकते हैं। जिसको देखते हुए सरकार ने पहले ही साफ शब्दों में कहे दिया है कि, “इन मैसेज को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है”, क्योंकि ये मैसेज केवल सिस्टम की जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इन मैसेज को भेजने का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय सही और समय पर जानकारी को लोगों तक पहुंचाना है।
कौन कर रहा है यह ट्रायल?
इस जरूरी ट्रायल को Department of Telecommunications (DoT) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें National Disaster Management Authority (NDMA) भी शामिल है। सुरक्षा के लिए दोनों संस्थाएं मिलकर देशभर में एक मजबूत और भरोसेमंद मोबाइल अलर्ट सिस्टम तैयार कर रही हैं। जिसको लेकर सरकार का लक्ष्य साफ है कि किसी भी आपदा या इमरजेंसी के दौरान लोगों को समय पर चेतावनी दी जाए, ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो सके।
कैसे काम करता है यह अलर्ट सिस्टम?
यह सिस्टम Common Alerting Protocol (CAP) पर आधारित है, जिसे International Telecommunication Union ने पेश किया है। इसके साथ ही यह तकनीक पहले से ही देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है। इसके जरिए किसी खास क्षेत्र में मौजूद मोबाइल यूजर्स को SMS के माध्यम से अलर्ट भेजा जा सकता है, यानी जहां खतरा होगा, सिर्फ उसी इलाके के लोगों को चेतावनी मिलेगी और खतरे से दूर लोगों को मैसेज की कोई परेशानी नहीं होगी।
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Cell Broadcast टेक्नोलॉजी से मिलेगा तुरंत अलर्ट
अब इस सिस्टम में Cell Broadcast (CB) टेक्नोलॉजी भी जोड़ी गई है। जिसकी मदद से एक ही इलाके में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ मैसेज भेजा जा सकता है। साथ ही इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अलर्ट लगभग रियल-टाइम में लोगों तक पहुंचाया जाता है। जो बड़े स्तर पर लोगों को तुरंत जानकारी देने के लिए सही है और इस तकनीक का फायदा भी लोगों को मुसीबत में बचाता है।
मेक इन इंडिया का शानदार उदाहरण
इस पूरे सिस्टम की खास बात ये है कि इसको भारत में ही Centre for Development of Telematics (C-DoT) ने डिजाइन किया है। जो मेक इन इंडिया पहल का एक मजबूत उदाहरण बनता है। इसके साथ ही सरकार इसे पूरी तरह लागू करने से पहले इसकी विश्वसनीयता और परफॉर्मेंस को परख रही है, इसलिए फिलहाल देशभर में इसका ट्रायल किया जा रहा है ताकी लोगों को इसकी जानकारी हो सकें।
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लोग क्या करें? जानिए जरूरी बात
लोगों के मोबाइल पर ट्रायल के दौरान हिंदी, अंग्रेजी या किसी क्षेत्रीय भाषा में मैसेज आ सकता हैं। जिसको लेकर सरकार ने स्पष्ट कहा है की, “इन मैसेज को इग्नोर करें और घबराएं नहीं। ये केवल सिस्टम की टेस्टिंग का हिस्सा हैं, ताकि असली आपदा के समय यह सही तरीके से काम कर सके।”
क्यों जरूरी है यह नया सिस्टम?
यह नया सिस्टम भारत जैसे विशाल देश के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योकि यहां बाढ़, भूकंप, चक्रवात और भारी बारिश जैसी आपदाएं कभी भी आ सकती हैं। ऐसे में अगर लोगों को समय रहते सर्तक किया जाए, तो बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही इसको नया मोबाइल अलर्ट सिस्टम में देश की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
