Vodafone Idea की टेलीकॉम विभाग से डिमांड, बैंक गारंटी में राहत की कही बात

टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड यानी वीआईएल को आने वाले साल के सितंबर महीने में देय 24,747 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम से जुड़े भुगतान के आश्वासन के तौर पर बैंक गारंटी जमा करने को कहा है।
Vodafone Idea is in talks with the Department of Telecommunications regarding exemption from bank guarantee
वोडाफोन आइडिया (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनी के रुप में पहचान बनाने वाली वोडाफोन आइडिया लिमिटेड यानी वीआईएल इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। कर्ज में डूबी इस कंपनी ने मंगलवार को बैंक गारंटी माफ करने के लिए दूरसंचार विभाग के साथ विचार विमर्श किया है। दरअसल वीआईएल को साल 2022 से पहले मिले स्पेक्ट्रम की पेमेंट की ड्यू डेट से 1 साल पहले बैंक गारंटी देना आवश्यक है।

टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड यानी वीआईएल को आने वाले साल के सितंबर महीने में देय 24,747 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम से जुड़े भुगतान के आश्वासन के तौर पर बैंक गारंटी जमा करने को कहा है। नियमों के मुताबिक, बैंक गारंटी भुगतान की ड्यू डेट से कम-से-कम एक साल पहले जमा करनी होती है।

टेलीकॉम विभाग से बातचीत

वीआईएल ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा है कि उसने बैंक गारंटी के संबंध में टेलीकॉम विभाग के साथ विस्तार से अपना पक्ष रखा है। दूरसंचार कंपनी ने कहा, ‘‘साल 2022 से पहले हासिल किए गए स्पेक्ट्रम के लिए बैंक गारंटी की शर्तों को हटाने के लिए टेलीकॉम विभाग के साथ हमारी बातचीत जारी है। यह इंडस्ट्री की भी मांग है।''

बैंक गारंटी प्रावधान से राहत

सूत्रों के अनुसार पता चला है कि टेलीकॉम विभाग ने स्पेक्ट्रम से जुड़ी ऑउटस्टैंडिंग पेमेंट के लिए बैंक गारंटी जमा करने से टेलीकॉम कंपनियों को छूट देने के मुद्दे पर वित्त मंत्रालय से भी संपर्क किया है।वोडाफोन आइडिया ने साल 2022 और साल 2024 के स्पेक्ट्रम नीलामी नियमों का हवाला देते हुए बैंक गारंटी प्रावधान से राहत की मांग की है। इन नियमों में वार्षिक किस्तों के लिए बैंक गारंटी देने का प्रावधान हटा दिया गया है।

सरकार की इतनी प्रतिशत हिस्सेदारी

बुरी फाइनेंशियल कंड़ीशन से गुजर रही दूरसंचार कंपनी ने पहले लंबित भुगतान पर लगभग 16,000 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी को चुकाया है और कंपनी में सरकार को हिस्सेदारी देने की पेशकश भी की है। सरकार के पास वीआईएल में लगभग 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वीआईएल ने सरकार से 70,000 करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर बकाये पर राहत की मांग की है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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