
Airtel (Source. X)
India 5G Network: भारत में 5G की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज़ है। स्वीडन की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी Ericsson की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2028 के अंत तक भारत में करीब 690 मिलियन 5G यूजर्स हो जाएंगे, जो देश की कुल आबादी का लगभग 55% हिस्सा होगा। साल 2022 में 5G लॉन्च होने के बाद से लोग तेजी से 5G-रेडी नेटवर्क और सिम की ओर शिफ्ट कर रहे हैं, खासकर मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के जरिए। लेकिन 5G के रोलआउट के शुरुआती दौर में एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है 5G NSA और 5G SA आखिर होते क्या हैं और इनमें फर्क क्या है?
NSA का मतलब है Non-Standalone 5G। आसान भाषा में कहें तो यह ऐसा 5G नेटवर्क है जो पूरी तरह अपने दम पर काम नहीं करता। इसमें 5G नेटवर्क, 4G LTE के कोर नेटवर्क यानी EPC (Evolved Packet Core) पर आधारित होता है। NSA मोड में फोन एक साथ 4G और 5G दोनों नेटवर्क से जुड़ा रहता है। कंट्रोल 4G संभालता है और डेटा 5G के जरिए जाता है। भारत में फिलहाल Airtel और Vi शुरुआती 5G रोलआउट के लिए इसी मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
SA यानी Standalone 5G पूरी तरह से नया और स्वतंत्र नेटवर्क होता है। इसमें न 4G की जरूरत होती है और न ही उसका कोर सिस्टम। SA 5G अपने 5G Core और 5G RAN पर काम करता है। यह तकनीक असली 5G अनुभव देती है जैसे बहुत कम लेटेंसी, ज्यादा स्पीड और लाखों डिवाइस को एक साथ जोड़ने की क्षमता।
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NSA सिर्फ तेज इंटरनेट देता है, जबकि SA 5G के तीनों बड़े लक्ष्य पूरे करता है:
यही वजह है कि NSA को शुरुआती कदम और SA को 5G का फाइनल रूप माना जाता है।
अभी भारत में 5G को हर कोने तक जल्दी पहुंचाने के लिए NSA का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर आप 5G-रेडी शहर में रहते हैं और आपके पास 5G फोन है, तो आप अपनी मौजूदा 4G सिम पर ही 5G स्पीड का मजा ले सकते हैं बिना किसी नए रिचार्ज के।






